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Bengal: 'जिंदगी के उस हिस्से में वापस आ गई, जिसे मैं यहीं छोड़ गई थी', सम्मान समारोह में बोलीं तस्लीमा नसरीन

Sat, 01 Aug 2026 08:04 PM IST
Pavan पीटीआई, कोलकाता

सार

19 साल बाद कोलकाता लौटीं बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन का सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ के कारण उन्हें देश छोड़ना पड़ा और बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में है। वहीं, इस दौरान सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल में हर व्यक्ति को खुलकर अपनी बात कहने की आजादी मिलेगी।
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तस्लीमा नसरीन, बांग्लादेशी लेखिका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। इस मौके पर सेक्युलर मिशन, ह्यूमन राइट्स एंड बांग्लादेश फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन (HRBFF) और पश्चिमबंगेर जन्नो की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उनका सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान तस्लीमा नसरीन ने अपने निर्वासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिलाओं के अधिकार और बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ पर खुलकर बात की। वहीं सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब 'धमकी की संस्कृति' खत्म हो चुकी है और हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार मिलेगा।
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'जिंदगी का एक हिस्सा वापस मिल गया'
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि 19 साल बाद कोलकाता लौटकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनकी जिंदगी का एक छूटा हुआ हिस्सा वापस मिल गया हो। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि दुनिया में किसी भी लेखक को अपने विचारों की वजह से अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने कहा, 'यूरोप ने मुझे नागरिकता और रहने की जगह दी, लेकिन दुख की बात है कि मैं दो बंगाल (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश) में अपने लिए एक छोटी-सी जगह भी नहीं पा सकी'।
 

'मैं किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं'
इस कार्यक्रम में तस्लीमा ने साफ कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में बोलने नहीं आई हैं। उनका उद्देश्य केवल महिलाओं के अधिकारों की बात करना है। उन्होंने कहा, 'मैं महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में बोल रही हूं। मेरा किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है'।

'कट्टरपंथियों की वजह से चुकानी पड़ी कीमत'
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्होंने अपने बचपन से इस्लामी कट्टरपंथ को करीब से देखा है और हमेशा हर तरह के कट्टरपंथ का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि किसी अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया, लेकिन कट्टरपंथियों के विरोध के कारण उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा, 'मैं सभी तरह के कट्टरपंथ के खिलाफ हूं। मैंने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ इसलिए आवाज उठाई क्योंकि मैंने उसे बचपन से देखा है। अदालत ने मुझे कभी सजा नहीं दी, लेकिन कट्टरपंथियों की वजह से मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ी'।

'बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा'
तस्लीमा ने कहा कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ तेजी से बढ़ रहा है और वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लगातार सीमित होती जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन ऐसा आएगा जब बांग्लादेश में महिलाएं और अल्पसंख्यक बिना डर के अपना जीवन जी सकेंगे। उन्होंने कहा, '19 साल बाद कोलकाता लौटना इस बात का प्रमाण है कि अन्याय लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं'।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
इस कार्यक्रम में मौजूद पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अब राज्य में डर और धमकी का माहौल खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, 'धमकी की संस्कृति के दिन खत्म हो गए हैं। आप जितनी बार चाहें बंगाल आइए। नई सरकार में बंगाल में हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार मिलेगा'।
 

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तस्लीमा नसरीन की वापसी पर टीएमसी की प्रतिक्रिया
तस्लीमा नसरीन की 19 साल बाद कोलकाता वापसी पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता कुणाल घोष ने कहा कि यह मौजूदा सरकार का प्रशासनिक फैसला है। उन्होंने कहा, 'इस पर मेरी कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं है'।
 
करीब 19 साल बाद कोलकाता लौटीं लेखिका तस्लीमा नसरीन का शनिवार को रवींद्र सदन में जोरदार स्वागत हुआ। उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग लंबी कतारों में खड़े रहे। सभागार में उनके हर शब्द के बाद तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। अपने प्रति लोगों का यह स्नेह देखकर तस्लीमा कई बार भावुक हुईं। उन्होंने कहा कि जिस शहर को उन्होंने अपनी भाषा और अपना घर माना, वहां लौटने में उन्हें करीब दो दशक लग गए। तस्लीमा ने कहा, कोलकाता लौट आई हूं, यह कहने में ही दो दशक लग गए। एक लेखक को अपनी भाषा के शहर में आने के लिए पुलिस की मदद की जरूरत पड़े, यह दुखद है। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल की बात करने नहीं आई हैं। वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता की बात करने आई हैं। उन्होंने कहा, डर हमेशा नहीं रहता, प्रतिबंध हमेशा नहीं रहते और बंद दरवाजे हमेशा बंद नहीं रहते। तस्लीमा ने अगस्त को अपने जीवन से जुड़े तीन दौरों का महीना बताया। उनके अनुसार, अगस्त उनका जन्म का महीना है, निर्वासन का महीना रहा और अब यह वापसी का महीना है।

'एक बंगाल में जन्म, दूसरे बंगाल में घर'
बांग्लादेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह देश उनके दिल में है। राज्य ने उन्हें देश से बाहर कर दिया, लेकिन उनके भीतर से देश को नहीं निकाल सका। उन्होंने कहा कि एक बंगाल में उनका जन्म हुआ और दूसरे बंगाल में उन्होंने घर तलाशा। कांटेदार तार भूगोल को बांट सकता है, भाषा को नहीं। तस्लीमा ने सवाल उठाया कि आखिर किस अपराध के लिए उन्हें बांग्लादेश से निर्वासित किया गया। कहा कि उनके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए और राज्य ने सुरक्षा देने के बजाय गिरफ्तारी वारंट जारी कर उन्हें बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म के सम्मान से बड़ा मनुष्य का सम्मान है। तस्लीमा ने अपनी कोलकाता वापसी को निजी घटना नहीं, बल्कि निर्वासन के खिलाफ जीत बताया।

बार-बार आएं, सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी- शुभेंदु
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तस्लीमा का स्वागत करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में सभी को आने और अपनी बात कहने का अधिकार है। उन्होंने तस्लीमा से कहा कि वह केवल एक बार नहीं, बल्कि बार-बार बंगाल आएं। मुख्यमंत्री ने उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का भरोसा भी दिया। तस्लीमा ने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

‘आत्मजीवनी समग्र’ का विमोचन
रवींद्र सदन में शनिवार को तस्लीमा नसरीन की पुस्तक ‘आत्मजीवनी समग्र’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने तस्लीमा का स्वागत किया। पुस्तक विमोचन के दौरान बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक मौजूद रहे। इस कार्यक्रम के दौरान जब एक कवि को मंच पर बुलाने की घोषणा हुई तो कुछ देर के लिए सभागार में हंगामा होने लगा। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और नाराजगी जताई। माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया। हालांकि आयोजकों और मंच पर मौजूद लोगों ने स्थिति संभाल ली और कार्यक्रम आगे बढ़ा। इस दौरान सभागार में कुछ देर तक शोर और चर्चा का माहौल बना रहा।
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