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SC: कार्यकाल के आखिरी दिन रो पड़े SC के न्यायाधीश एमआर शाह, कहा- मैं सेवानिवृत्त होने वाला व्यक्ति नहीं…

Mon, 15 May 2023 03:21 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शाह हमेशा चुनौती के लिए तैयार रहते हैं। यहां तक कि कोविड के समय में भी मैंने पाया कि जब हम अपने-अपने घरों में बैठे थे और कुछ पेचीदे मामले सामने आ रहे थे उस समय वह हर चुनौती के लिए तैयार थे।
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न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के चौथे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह का सोमवार यानी आज उनके काम का आखिरी दिन था। इस दौरान वह भावुक हो गए। उन्होंने रोते हुए कहा कि वह सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति नहीं हैं। जीवन में एक नई पारी की शुरुआत करेंगे। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली औपचारिक बेंच पर बैठे न्यायमूर्ति शाह ने अपने भाषण के अंत में राज कपूर का फेमस गाना ‘जीना यहां, मरना यहां’ गाया। 

उन्होंने कहा कि मैं सेवानिवृत्त होने वाला व्यक्ति नहीं हूं। मैं अपने जीवन की एक नई पारी शुरू करने जा रहा हूं। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह नई पारी के लिए शक्ति और साहस और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करें। साथ ही उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि मुझे राज कपूर का गाना ‘कल खेल में हम हो ना हो, गर्दिश में तारे रहेंगे सदा' याद आ रहा है।

बता दें, 2 नवंबर, 2018 को शीर्ष अदालत में नियुक्त किए गए न्यायमूर्ति शाह की सेवानिवृत्ति के साथ शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या अब सीजेआई सहित 32 हो जाएगी। एक दिन पहले ही जस्टिस दिनेश माहेश्वरी सेवानिवृत्त हुए थे।

प्रधान न्यायाधीश ने तारीफ के बांधे पुल

विदाई समारोह में प्रधान न्यायाधीश ने शाह के साथ अपने रिश्तों को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं भारत का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल था उस समय से मेरा शाह के साथ रिश्ता है। बाद में जब वह सुप्रीम कोर्ट में आए तो हमारी दोस्ती को एक नया रूप मिल गया। उन्होंने कहा कि हम कठिन समय में कोरोना महामारी के दौरान एक साथ बैठे। सीजेआई ने आगे कहा कि जब मैं शाम को इस अध्यक्षता से मुक्त हो जाऊंगा, तब शाह के दोस्त के रूप में आप सभी से बात करूंगा। 

काम से कभी पीछे नहीं हटे

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शाह हमेशा चुनौती के लिए तैयार रहते हैं। यहां तक कि कोविड के समय में भी मैंने पाया कि जब हम अपने-अपने घरों में बैठे थे और कुछ पेचीदे मामले सामने आ रहे थे उस समय वह हर चुनौती के लिए तैयार थे। उन्होंने कहा कि वह कभी ऐसे व्यक्ति नहीं रहे, जो काम से बचते हों। अगर मैंने एक निर्णय भेजा होगा तो शाह का फैसला रातोंरात उनकी टिप्पणियों के साथ वापस आ जाता था।  

शाह ने साथियों से मांगी माफी

न्यायमूर्ति शाह ने सुप्रीम कोर्ट  के न्यायाधीश के रूप में सेवा करने में मदद करने के लिए बार के सदस्यों, सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों और उनके सहायक कर्मचारियों को धन्यवाद दिया। शाह ने कहा कि मुझे नहीं पता कि मैं इसके लायक हूं या नहीं, लेकिन मैं इसे विदाई उपहार के रूप में स्वीकार करता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान अगर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो मैं माफी मांगता हूं। मैंने हमेशा अपने काम को पूजा के रूप में लिया है। मैं आपके द्वारा दिए गए प्यार और स्नेह से अभिभूत हूं। मैं सभी का आभारी हूं।

बार ने कहा- आपके परिवार को भी मिलना चाहिए आपका समय

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य सहित बार के नेताओं ने बेंच में जस्टिस शाह को उनके सेवानिवृत्ति के लिए बधाई दी। मेहता ने कहा कि मैंने अपने भगवान को एक न्यायाधीश के रूप में और एक वकील के रूप में भी जाना है, वह उन कुछ बहादुर न्यायाधीशों में से एक हैं जिन्हें मैंने जाना है। आपके द्वारा लिखे गए निर्णयों की संख्या से पता चलता है कि आपके परिवार ने सबसे अधिक पीड़ा झेली है। अब आपका समय उनको भी मिलना चाहिए। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि वह न्यायमूर्ति शाह को काफी लंबे समय से जानते हैं और वह एक वकील की तरह निडर हैं।

शाह की उपलब्धियों पर एक नजर

  • न्यायमूर्ति मुकेश कुमार रसिकभाई शाह का जन्म 16 मई, 1958 को हुआ था।

  • 19 जुलाई, 1982 को एक वकील के रूप में नामांकन कराया। 

  • उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय में भूमि, संवैधानिक और शिक्षा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की।

  • 7 मार्च, 2004 को गुजरात उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए।

  • 22 जून, 2005 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।

  • उन्हें 12 अगस्त, 2018 को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था।

  • उन्हें 2 नवंबर, 2018 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और वह आज यानी 15 मई, 2023 को सेवानिवृत्त हुए हैं।

 

 

 

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