केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 14 जून को आपात लैंडिंग करने वाला ब्रिटेन की रॉयल नेवी का अत्याधुनिक F-35B लड़ाकू विमान तीन दिन बाद भी उड़ान नहीं भर सकता है। जानकारी के मुताबिक, जेट के एक खास हिस्से में खराबी आने के कारण विमान वही खड़ा है।
ब्रिटेन की रॉयल नेवी का अत्याधुनिक एफ-35बी लड़ाकू विमान पिछले तीन दिनों से तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़ा है। 14 जून को इसमें हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी एक संभावित तकनीकी खराबी आई थी, जिसके चलते इसे आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी। यह फाइटर जेट यूके के विमानवाहक पोत एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स से उड़ान भर रहा था और भारतीय वायु क्षेत्र के बाहर एक नियमित अभ्यास मिशन पर था। तभी इसमें तकनीकी दिक्कत आने पर इसे तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया, जिसे पहले से एक आपातकालीन लैंडिंग स्थल के रूप में चिन्हित किया गया था।
हाइड्रोलिक समस्या के कारण एयरपोर्ट पर ही खड़ा
हालांकि लैंडिंग सुरक्षित रूप से हो गई, लेकिन अभी तक विमान की हाइड्रोलिक प्रणाली की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इस वजह से अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का यह स्टील्थ फाइटर विमान तीसरे दिन भी एयरपोर्ट पर ही खड़ा है।
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मरम्मत और देखरेख में जुटी टीम
इस घटना के हाद रॉयल नेवी के तकनीकी विशेषज्ञ तुरंत विमान का निरीक्षण करने पहुंचे। मंगलवार को छह सदस्य वापस पोत पर लौट गए, जबकि तीन लोग – जिनमें पायलट भी शामिल हैं – विमान की मरम्मत का काम देखने के लिए वहीं रुक गए हैं। बता दें कि, आपात लैंडिंग के बाद पायलट विमान के कॉकपिट में नहीं रुका। उसे एयरपोर्ट के अपरोन ऑफिस एरिया में आराम के लिए ले जाया गया। सुरक्षा के तहत उसे और अन्य क्रू सदस्यों को हवाई अड्डे के इमरजेंसी मेडिकल सेंटर में भी जांच के लिए ले जाया गया।
स्थानीय सहयोग और सुरक्षा प्रबंध
तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड ने पायलट और टीम के लिए ठहरने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की है। रॉयल नेवी के अनुरोध पर एक स्थानीय ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी को भी तैनात किया गया है। वहीं, भारतीय वायु सेना ने अपने आईएसीसीएस रडार नेटवर्क के जरिए विमान की निगरानी की और लैंडिंग के लिए हरी झंडी दी थी। अब वह ब्रिटिश टीम को विमान को फिर से उड़ान के योग्य बनाने में पूरा सहयोग दे रही है।
ब्रिटेन का अत्याधुनिक F-35B फाइटर जेट हाइड्रोलिक समस्या के कारण भारत के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर मजबूरी में उतरा था। लैंडिंग तो सुरक्षित रही, लेकिन तकनीकी खराबी अब तक ठीक नहीं हो पाई है। ब्रिटिश और भारतीय टीमें मिलकर इसे जल्द उड़ान के लिए तैयार करने में जुटी हैं।