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Hyderabad Liberation Day: हैदराबाद में शाह की 'शतरंज', निशाने पर केसीआर, तो 'भगवा' को देंगे मजबूती

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 16 Sep 2022 11:09 PM IST

सार

Hyderabad Liberation Day: तेलंगाना में 2018 के दौरान हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के खाते में केवल एक सीट आई थी। यहां 2023 में विधानसभा चुनाव हैं, तो उसके अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा का प्रयास है कि विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जाए...
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Hyderabad Liberation Day: Amit Shah in Telangana - फोटो : Amar Ujala (File Photo)


भाजपा को 6.98 फीसदी वोट मिले थे। यहां 2023 में विधानसभा चुनाव हैं, तो उसके अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा का प्रयास है कि विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जाए। 2019 में भाजपा को पहली बार चार लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा ने 20 फीसदी वोटों पर कब्जा जमाया था। तेलंगाना राष्ट्रवादी समिति नौ और कांग्रेस पार्टी के खाते में तीन लोकसभा सीटें आई थीं।

भाजपा की डिजिटल घड़ी, जिसमें रोजाना घट रहा एक दिन

भाजपा ने अपने कार्यालय में डिजिटल घड़ी लगाई है। इस घड़ी में लिखा गया है कि अब तेलंगाना सरकार के इतने दिन बाकी बचे हैं। रोजाना एक दिन कम हो रहा है। तेलंगाना के जरिए भाजपा, दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों को भी साधना चाहती है। यही वजह रही कि इस बार भाजपा ने अपनी दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हैदराबाद में आयोजित की थी। पार्टी के बढ़ते प्रभाव का असर कहीं न कहीं मुख्यमंत्री केसीआर पर भी दिख रहा है। वे पिछले कुछ दिनों से पीएम मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ बयान जारी कर रहे हैं। विपक्ष के साथ मिलकर 2024 में भाजपा को कड़ी टक्कर देने की रणनीति बना रहे हैं। विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम के तहत गत दिनों बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ उनकी मुलाकात काफी चर्चित रही। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में 'विजय संकल्प रैली' में तेलंगाना की जनता से टीआरएस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था। शाह ने कहा था कि मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के खराब नेतृत्व के कारण तेलंगाना पिछड़ता जा रहा है।

'तेलंगाना मुक्ति दिवस' को संजीवनी की तरह मान रही भाजपा

अमित शाह ने हैदराबाद के जिस परेड मैदान में विजय संकल्प रैली को संबोधित किया था, शनिवार को वे वहीं पर आयोजित हो रहे 'तेलंगाना मुक्ति दिवस' कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। विजय संकल्प रैली में शाह ने कहा था, तेलंगाना सरकार यह आयोजन करने से डरती रही है। भाजपा की सरकार बनने के बाद पार्टी आधिकारिक तौर पर 'तेलंगाना मुक्ति दिवस' मनाएगी। अब भाजपा, इस कार्यक्रम को संजीवनी मानकर इसे बड़े स्तर पर आयोजित कर रही है। ऐसी संभावना है कि इस कार्यक्रम में कई दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी शिरकत करेंगे। सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर 'तेलंगाना मुक्ति दिवस' की जगह पर 'राष्ट्रीय एकता दिवस' आयोजित करने की सलाह दी थी। निजामों के नेतृत्व वाले पूर्ववर्ती हैदराबाद राज्य का 17 सितंबर 1948 को भारत में विलय किया गया था। इस वजह से भाजपा द्वारा यह मांग की जाती रही है कि इस दिन को 'तेलंगाना मुक्ति दिवस' के रूप में मनाया जाए।

तांत्रिक ने क्या कहा था मुख्यमंत्री केसीआर को!

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने अपनी रैली में कहा था, केसीआर पिछले आठ साल से सरकार चला रहे हैं, लेकिन वे एक भी दिन सचिवालय में नहीं पहुंचे। उन्हें एक तांत्रिक ने सलाह दी थी कि वे सचिवालय गए तो उनकी सरकार चली जाएगी। शाह ने केसीआर का नाम लेते हुए कहा, आपको सचिवालय जाने की जरूरत नहीं है। अब भाजपा को वहां जाने का मौका मिलेगा। तेलंगाना में अगली सरकार भाजपा की होगी। मुख्यमंत्री केसीआर को प्रदेश और उसके बेरोजगारों की चिंता नहीं है। वे चाहते हैं कि किसी तरह उनका बेटा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हैदराबाद को 'भाग्यनगर' कहा था। उन्होंने कहा, सरदार पटेल ने भाग्यनगर में ही 'एक भारत' का नारा दिया था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाग्यनगर, भाजपा के लिए हिंदुत्व कार्ड है। हैदराबाद नगर निगम के चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भी हैदराबाद को भाग्यनगर कहा था। तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी लगभग 82 फीसदी है। यहां पर मुस्लिम आबादी 13 फीसदी बताई जाती है।

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