इस साल मई में एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की पत्नी की सनसनीखेज हत्या के मामले में, नेपाल के एक गिरोह के चार सदस्यों (जिनमें एक महिला भी शामिल है) को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी पुलिस ने सोमवार को दी।
पुलिस ने क्या बताया?
हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वी. सी. सज्जनार ने बताया कि एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पुलिस ने नेपाल के एक कुख्यात अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को पकड़ा है, जो रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की बेरहमी से की गई हत्या (जो लूट के इरादे से की गई थी) के लिए जिम्मेदार थे।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 7-8 मई की रात को जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले प्रशासन नगर में हुई। 8 मई को, पीड़िता की बेटी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी मां अपने बेडरूम में मृत पाई गईं; उनके हाथ बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था।
बेडरूम में काफी तोड़फोड़ की गई थी, अलमारियां तोड़ी गई थीं और कीमती सामान गायब था। पुलिस ने बताया कि घर में काम करने वाली नौकरानी, नेपाल की रहने वाली धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना, फरार पाई गई और उसका मोबाइल फोन भी बंद था।
जांच में क्या पता चला?
सज्जनार ने बताया कि जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपियों ने एक साथ मिलकर घर में जबरन प्रवेश किया, पीड़िता का दम घोंटकर उसकी हत्या कर दी, और 225 ग्राम सोने के गहने तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए।
पुलिस ने कैसे पकड़ा?
उन्होंने बताया कि लगातार कोशिशों, चौबीसों घंटे तकनीकी निगरानी और अलग-अलग राज्यों में संदिग्धों पर लगातार नजर रखने के बाद, हैदराबाद सिटी पुलिस की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने पुख्ता जानकारी के आधार पर सोमवार को शहर के नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास इन चार लोगों को पकड़ लिया।
पकड़े गए लोगों की पहचान धर्मा, गणेश बी.के., चंद्र बहादुर तमांग और गणेश बहादुर शाही के रूप में हुई है। ये सभी नेपाल के रहने वाले हैं। ये लोग घरेलू सहायिका, मजदूर, रसोइया और चौकीदार के तौर पर काम करते थे। पुलिस ने इनके पास से कुछ संदिग्ध सामान और 51,130 रुपये नकद भी बरामद किए हैं। इससे पहले, 22 मई को टास्क फोर्स की टीमों ने मुख्य आरोपी सुनील बहादुर औजी और चोरी का सामान लेने वाले दिलीप बहादुर मिजार को पकड़ा था। उनके पास से चोरी का 26 ग्राम सामान बरामद किया गया था।
गिरोह के संपर्क में कैसे आई?
पुलिस के मुताबिक, धर्मा अपने एक रिश्तेदार के जरिए हैदराबाद आई और घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने लगी। काम करने के दौरान, वह पुणे में रहने वाले एक नेपाली नागरिक, विकास के संपर्क में रही। अप्रैल में, वह अपने बीमार पिता को देखने पुणे गई, जहां वह इस गिरोह के सदस्यों के संपर्क में आ गई।
पुलिस ने बताया कि 7 मई को गणेश और बाकी आरोपियों ने धर्मा से उसके काम की जगह के पास मुलाकात की। उन्होंने उस जगह की रेकी की और धर्मा को निर्देश दिया कि वह उनके अंदर आने का इंतजाम कैसे करे। 7-8 मई की रात, योजना के मुताबिक धर्मा ने दरवाजा खोला और गिरोह के बाकी सदस्य घर के अंदर घुस गए।
कमिश्नर ने बताया, 'जब पीड़ित महिला अचानक जाग गई, तो एक आरोपी ने उसका मुंह बंद कर दिया और उस पर हमला किया। वहीं, गणेश ने उसे पकड़कर उसके हाथ-पैर बांध दिए, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई।'
आरोपियों ने अलमारियां खंगालीं और सोने के गहने व अन्य कीमती सामान लूट लिया। पुलिस ने बताया कि अपराध करने के बाद, आरोपी पिछले दरवाजे से भाग निकले। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए वे तीन छोटे समूहों में बंट गए और नेपाल चले गए, जहां उन्होंने नेपाल की अलग-अलग जगहों पर चोरी का सामान ठिकाने लगा दिया।