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जघन्य अपराधियों के दया याचिका देने के चलन की समीक्षा की जरुरत: वेंकैया नायडू 

Mon, 02 Dec 2019 03:01 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसे जलाकर मार डालने की घटना की गूंज संसद के दोनों सदनों में सुनाई पड़ी। राज्यसभा में ज्यादातर सदस्यों ने ऐसे मामलों में शीघ्र सुनवाई कर दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की। वहीं सभापति एम वेंकैया नायडू ने ऐसे जघन्य अपराधों के दोषियों द्वारा उच्च अदालतों में अपील करने और दया याचिका दायर करने की अनुमति देने के चलन की समीक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया।

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सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने हैदराबाद की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिए गए कार्यस्थगन नोटिसों को उन्होंने अस्वीकार कर दिया है। लेकिन यह मुद्दा बेहद गंभीर है और इस पर वह सदस्यों को अपनी बात संक्षेप में कहने की अनुमति देंगे।

सभापति ने कहा कि यह बेहद निर्मम घटना थी और सदस्यों को संयमित रहते हुए अपनी बात रखनी चाहिए। हैदराबाद की घटना पूरे मानवता के लिए शर्म की बात है और ऐसी घटनाएं पूरे देश में हो रही हैं। सदस्यों द्वारा अपनी बात रखने के बाद सभापति नायडू ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और उनकी सुरक्षा को किसी भी तरह का खतरा नहीं होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में निचली अदालतों में सजा सुनाए जाने के बाद दोषी न केवल आगे की अदालतों में अपील करते हैं बल्कि माफी के लिए क्षमा याचिका भी देते हैं। इस चलन की समीक्षा की जानी चाहिए।

नायडू ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें ही एकमात्र समाधान हैं लेकिन अपील दर अपील का सिलसिला भी चलता रहता है। क्या ऐसे व्यक्ति को माफी दिए जाने के बारे में सोचा जा सकता है? हमें कानूनी तंत्र में, हमारी न्यायिक प्रणाली में बदलाव के बारे में सोचना होगा। 
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