मेजा तहसील के पौषिया दुबे गांव में शुक्रवार को भूख से पति-पत्नी की मौत हो गई। दोनों साल भर से आर्थिक तंगी झेल रहे थे। उनके पास न तो राशन कार्ड था न ही किसी सरकारी योजना का उन्हें लाभ मिला था। वे अपने पीछे दो बेटों को छोड़ गए हैं, जिनकी उम्र दस साल से भी कम है। मां-बाप की मौत के बाद बच्चों के सामने संकट खड़ा हो गया है कि अब उनका लालन-पालन कौन करेगा। दंपति की मौत से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा है और हमेशा की तरह अफसर मौत की वजह भूख मानने को तैयार नहीं हैं।
पौषिया गांव निवासी रामधारी पटेल (47) के पास आय को कोई जरिया नहीं था। उसकी पत्नी नीलम (44) और बड़ा बेटा अमरजीत (नौ वर्ष) एवं छोटा बेटा समरजीत (सात वर्ष) को पास-पड़ोस से कुछ मिल जाता था तो उनका पेट भरता था। पूरा परिवार तालाब किनारे छप्पर लगाकर रहता था।
पिछले दिनों आई बाढ़ में छप्पर बह गया और ग्राम प्रधान मणि शंकर दुबे ने पूरे परिवार को पंचायत भवन में शिफ्ट कर दिया। परिवार के पास न तो राशन कार्ड था और न ही आय का कोई जरिया। थोड़ा बहुत खाने को मिल गया तो मां-बाप भूखे रहकर बच्चों को खिला देते थे। भूख के कारण रामधारी और उसकी पत्नी नीलम बीमार पड़ गए। शुक्रवार सुबह रामधारी की तबीयत अचानक बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
अंतिम संस्कार के लिए भी पैसा नहीं था, सो गांव वालों ने उसका शव सिरसा गंगाघाट पर प्रवाहित कर दिया। शाम तकरीबन साढ़े छह बजे पत्नी नीलम ने भी दम तोड़ दिया। उसका शव भी प्रवाहित कर दिया गया।