धोखाधड़ी और गैर-निष्पादित संपत्तियों के मामलों में भारी हंगामे के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब सौ भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी की है। यह खुलासा केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की एक रिपोर्ट से हुआ है।
सीवीसी बीते चार महीनों से ज्यादा वक्त से 98 बैंक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। वरिष्ठ प्रबंधक, मुख्य प्रबंधक और महाप्रबंधक स्तर के इन अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। इन 43 मामलों में 49 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का भी इंतजार किया जा रहा है।
सीवीसी की फरवरी की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से सबसे ज्यादा सात मामले इंडियन ओवरसीज बैंक के हैं, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के दो-दो और ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स, कार्पोरेशन बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, एक्जिम बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा का एक-एक मामला हैं। नियमों के मुताबिक, मुकदमे की मंजूरी का फैसला चार महीने के भीतर करना जरूरी है।
सीवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘हमने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी में देरी के मामले को कई अंतर-मंत्रालयी बैठकों में उठाया। लेकिन ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। हम इस बारे में विभिन्न विभागों को फिर से लिखेंगे।’