मानवाधिकार मंच (एचआरएफ) की आंध्र प्रदेश राज्य समिति ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट से बर्खास्त किए गए ठेका श्रमिकों के आंदोलन का समर्थन किया है। एचआरएफ ने सरकार से मांग की है कि हाल ही में बर्खास्त किए गए 3,000 ठेका श्रमिकों की बहाली की जाए।
मानवाधिकार मंच (एचआरएफ) की आंध्र प्रदेश राज्य समिति ने बृहस्पतिवार को विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (वीएसपी) से बर्खास्त किए गए 3,000 ठेका श्रमिकों की बहाली की मांग की है। एचआरएफ ने इस कार्रवाई को सरकार की निजीकरण नीति का गलत कदम बताया। साथ ही कहा कि वह स्टील प्लांट के ठेका श्रमिकों के आंदोलन का समर्थन करता है।
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एचआरएफ ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वीएसपी के ठेका मजदूर पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ठेका श्रमिक प्रबंधन द्वारा उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं। इसके बावजूद वह अपने वैध अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। एचआरएफ की मांग है कि हाल ही में बर्खास्त किए गए 3,000 ठेका श्रमिकों को तुरंत बहाल किया जाए।
श्रमिकों को डराने के लिए पुलिस के इस्तेमाल की निंदा की
वीएसपी को राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के नाम से भी जाना जाता है, जो कथित रूप से अन्य 1,800 ठेका श्रमिकों को बर्खास्त करने की तैयारी में है। एचआरएफ ने उद्योग को ऐसा न करने की सलाह दी है। साथ ही उद्योग प्रबंधन द्वारा श्रमिकों को डराने के लिए पुलिस के कथित इस्तेमाल की निंदा की। एचआरएफ ने कहा है कि बातचीत के बजाय भय पैदा करने की रणनीति अपनाना, विशेषकर तब जब संयंत्र में उत्पादन प्रभावित हो रहा हो, अस्वीकार्य है।
श्रमिकों को बुनियादी अधिकारों से रखा जा रहा वंचित
एचआरएफ ने कहा कि ठेका श्रमिक प्लांट में रोजमर्रा के काम की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें कार्यस्थल पर बुनियादी अधिकारों, नौकरी की सुरक्षा और सम्मान से वंचित रखा जाता है। एचआरएफ ने आगे कहा कि श्रमिक नियमितीकरण और उचित वेतन की लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें धमकाया और हटाया जा रहा है। एचआरएफ ने सरकार और प्रबंधन से बातचीत करके मुद्दों के लोकतांत्रिक समाधान की अपील की है।
केंद्र सरकार प्लांट को निजी कंपनियों को बेचने की कर रही साजिश
एचआरएफ का आरोप है कि केंद्र सरकार जानबूझकर इस्पात प्लांट को घाटे में दिखाकर निजी कंपनियों को बेचने व्यवस्थित साजिश कर रही है। इसके लिए 11,440 करोड़ रुपये का पैकेज जारी कर रही है और जीएसटी और अन्य बकाया माफ कर रही है। एचआरएफ ने कहा कि इस प्लांट के लिए 32 लोगों ने बलिदान दिया है। साथ ही 69 गांवों के लोगों ने स्वैच्छिक रूप से भूमि दान दी है। तब जाकर इस प्लांट का निर्माण संभव हो सका है। एचआरएफ ने कहा कि एक बहुमूल्य औद्योगिक संपत्ति को कॉर्पोरेट हितों को सौंपने के सरकार के इस प्रयास की वह निंदा करते हैं।