राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्र और महाराष्ट्र सरकार को 639 किसानों की आत्महत्या मामले में नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करके चार हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मार्च से लेकर मई तक महाराष्ट्र के 639 किसानों ने आत्महत्या की। राज्य सरकार ने विधानसभा को बताया था कि किसानों की आत्महत्या की वजह ऋण न चुका पाना और बैंकों से उन्हें किसी तरह की आर्थिक मदद न मिलना रहा।
आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और मुख्य सचिव से इस मामले की चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा आयोग ने पूछा है कि राज्य की योजनाओं की स्थिति और इन योजनाओं से कितने पीड़ित परिवारों को फायदा पहुंचा है । आयोग ने केन्द्र सरकार से भी पूछा है कि किसानो की इस स्थिति को देखते हुए क्या कोई योजना या मैकेनिज्म बनाया गया है।
आयोग को महाराष्ट्र समेत पूरे देश से किसानों की मौत के बारे में शिकायतें मिलती रही हैं। आयोग ने सभी मामलों पर खुद संज्ञान लेकर केन्द्र और महराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि इतनी बड़ी तादाद में किसानों का आत्महत्या करना काफी गंभीर मामला है। क्योंकि क्योंकि पीड़ित परिवार में कमाई करने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु से उनका परिवार भी भारी दबाव में आ जाता है।