असम पुलिस की तरफ से किए गए एनकाउंटरों पर छिड़ी राजनीतिक रार के बीच राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। पिछले दो महीनों में हुई इन मुठभेड़ में 12 लोगों की मौत हुई है, जिन्हें लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और अगपा ने राज्य की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।
असम मानवाधिकार आयोग (एएचआरसी) ने इन मुठभेड़ से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की है। आयोग के सदस्य नाबा कमल बोरा ने अपने आदेश में कहा है कि मीडिया रिपोर्टों में पुलिस फायरिंग के समय सभी आरोपियों के पास कोई हथियार नहीं होने और उनके हाथ बंधे होने का दावा किया गया है।
उन्होंने राज्य के गृह सचिव को स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इस मामले में जांच शुरू करने का आदेश दिया है, जिसमें मुठभेड़ के दौरान की परिस्थितियों और तथ्यों को बारीकी से परखे जाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही ताकीद की है कि पुलिस हिरासत में या उसका पीछा करने के दौरान आरोपी पर फायरिंग करना एक ट्रेंड नहीं बनना चाहिए। गृह सचिव को 17 अगस्त तक रिपोर्ट आयोग के पास दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
असम में पुलिस ने ढेर किया बोडो जिला कमांडर
असम के उदलगुड़ी जिले में मंगलवार को पुलिस ने मुठभेड़ में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनएलएफबी) के एक जिला कमांडर को मार गिराया। विशेष पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। सिंह के मुताबिक, एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने सुबह माजबात पुलिस थाना क्षेत्र के दिमाचांग में तलाशी अभियान शुरू किया, जिसमें एनएलएफबी का स्वयंभू उदलगुड़ी जिला कमांडर जयपुरुष मारा गया।
उसके कब्जे से एक पिस्टल और बहुत सारे कारतूस बरामद किए गए। सिंह के मुताबिक, मारा गया उग्रवादी एनडीएफबी के पूर्व नेता एम. बाथा का करीबी था। बाथा ने तीसरे बोडो शांति समझौते के तहत पिछले साल जनवरी में बहुत सारे साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था। लेकिन बाद में बाथा ने दोबारा घने जंगलों में ठिकाना बनाकर एनएलएफबी के गठन की घोषणा कर दी थी। इस उग्रवादी संगठन पर बोडोलैंड स्वायत्त क्षेत्र के तहत आने वाले जिलों में रंगदारी वसूलने और हत्याएं करने के बहुत सारे आरोप हैं।