करीब एक महीना पहले विश्व कैंसर दिवस पर, मनोहर परिकर ने अपनी जानलेवा बीमारी से लड़ने के अपने दृढ़ संकल्प का संकेत दिया था, जब उन्होंने कहा था कि मानव मन किसी भी बीमारी को हरा सकता है।
इसके बाद परिकर को नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था।
परिकर ने चार फरवरी को ट्वीट किया था, "मानव मन किसी भी बीमारी को हरा सकता है।"
यह ट्वीट करने के 41 दिन बाद परिकर का पणजी में निधन हो गया। पिछले साल फरवरी में पता चला था कि वे फरवरी में अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित हैं। साल 2001 में उनकी पत्नी मेधा की भी कैंसर से मृत्यु हो गई थी।
पिछले एक साल के दौरान परिकर का गोवा, मुंबई, नई दिल्ली और न्यूयॉर्क के अस्पताल में इलाज चला था। मगर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे आखिरी सांस तक काम करेंगे। 27 जनवरी को वह पणजी में नितिन गडकरी के साथ सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के दौरान दिखाई दिए थे। इसके बाद 30 जनवरी को उन्होंने राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान उनकी नाक में ट्यूब लगी हुई थी।
हर राजनीतिक दल के नेताओं ने परिकर की तारीफ की है कि उन्होंने आखिरी सांस तक गोवा के लिए काम किया।
बतौर मुख्यमंत्री परिकर बिना किसी की फिक्र किए स्कूटर से दफ्तर पहुंच जाते थे। लोग उन्हें स्कूटर वाला मुख्यमंत्री भी कहते थे। परिकर आधी बांह की शर्ट पहनना पसंद करते थे। उन्हें वीआईपी कल्चर बिलकुल पसंद नहीं था, यही वजह थी कि वो रेस्तरां की बजाय फुटपाथ पर चाय-नाश्ता किया करते थे। यहीं से मोहल्लों की खबर जुटा लिया करते थे।
डॉक्टर मनोहर गोपालकृष्णन प्रभु परिकर चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार 2000 से 2002 तक, दूसरी बार 2002 से 2005, तीसरी बार 2012 से 2014 और चौथी बार 14 मार्च 2017 से 2019 तक। 2017 में जब भाजपा गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से दूर थी, तब दूसरे दलों ने परिकर को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर ही समर्थन दिया था।