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मस्तिष्क: स्ट्रोक, पार्किंसंस का जिला अस्पतालों में भी इलाज; नीति आयोग ने राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया

Sat, 20 Apr 2024 05:32 AM IST
ज्योति भास्कर परीक्षित निर्भय, अमर उजाला

सार

मस्तिष्क के स्वास्थ्य को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब एक अहम फैसले के बाद स्ट्रोक, पार्किंसंस का जिला अस्पतालों में भी इलाज होगा। नीति आयोग ने राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है।
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इंसानों का मस्तिस्क (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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जल्द ही देश के सभी जिला अस्पतालों में स्ट्रोक, मिर्गी, सिरदर्द और पार्किंसंस जैसे तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियों का इलाज मिलेगा। सरकार ने मस्तिष्क स्वास्थ्य को लेकर जमीनी स्तर पर काम करने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है जो अगले 10 सप्ताह के भीतर देश के प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों के लिए नीतियां तय करेगा। नीति आयोग के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रभाग ने दिल्ली स्थित इहबास अस्पताल के निदेशक डॉ. राजिंदर के धमीजा की अध्यक्षता में नौ सदस्यों का राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित किया है। इसमें दिल्ली एम्स से लेकर आईसीएमआर तक के विशेषज्ञ शामिल हैं।
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टास्क फोर्स में ये शामिल
दिल्ली के इहबास अस्पताल के निदेशक डॉ. राजिंदर के धमीजा की अध्यक्षता में टास्क फोर्स में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की आर्थिक सलाहकार इंद्राणी कौशल, संयुक्त सचिव (सामाजिक रक्षा) राधिका चक्रवर्ती, डीईपीडब्ल्यूडी के संयुक्त सचिव राजेश यादव, निम्हांस की वरिष्ठ डॉ. सुवर्णा अल्लादी, दिल्ली एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ.मंजरी त्रिपाठी, पूर्व बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा कालरा, आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रविंदर सिंह और नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार राजीव कुमार सेन शामिल हैं।

लगातार बढ़ रहा खतरा
सरकारी आंकड़े यह भी बताते हैं कि भारत में गैर-संचारी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का योगदान वर्ष 1990 में 4% से दोगुना होकर वर्ष 2019 में 8.2% तक पहुंचा है जबकि चोट से संबंधित न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का योगदान 0.2% से बढ़कर 0.6% तक हुआ है।
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हर वर्ष 90 लाख मौतें हो रहीं
दुनिया भर में विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष का प्रमुख कारण तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियां हैं जो हर साल करीब 90 लाख मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। अकेले भारत की बात करें तो बीते तीन दशक में सामने आए चिकित्सा अध्ययनों में यह पता चला है कि स्ट्रोक, मिर्गी, सिरदर्द, पार्किंसंस रोग और मनोभ्रंश जैसी बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है।
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