मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को यह स्पष्ट कर दिया कि हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला की मौत पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश एके रुपनवाल आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में रखी जा चुकी है और अब यह एक सार्वजनिक दस्तावेज है जिसे सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त किया जा सकता है।
मंत्रालय उस सवाल का जवाब दे रहा था जिसमें उससे पूछा गया था कि उसने रोहित वेमुला की मौत पर आयोग की रिपोर्ट मांगने वाली आरटीआई को खारिज कर दिया था। एक आरटीआई के जवाब में मंत्रालय ने कहा था कि यह फाइल अभी अंडर सबमिशन है और इस रिपोर्ट की कॉपी नहीं दी जा सकती।
मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि हमने उस आरटीआई का जवाब उस समय दिया था जब रिपोर्ट संसद में पेश नहीं की गई थी। जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत अनिवार्य आवश्यकता है कि आयोग द्वारा सरकार के सामने रिपोर्ट पेश किए जाने के छह महीने के अंदर उस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाए।
मंत्रालय ने कहा कि 15 दिसंबर, 2015 को संसद के दोनों सदनों में रिपोर्ट को पेश किया गया। इसलिए अब यह एक सार्वजनिक दस्तावेज है जिसे कोई भी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त कर सकता है।