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VHP: वक्फ बोर्ड के चंगुल में जाने से कैसे बची दिल्ली की 123 बेशकीमती संपत्तियां? विहिप ने चलाया था अभियान

Thu, 03 Apr 2025 01:15 PM IST
अमित शर्मा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विहिप का उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल - फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2 अप्रैल को लोकसभा में कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जाने से पहले दिल्ली की 123 बेशकीमती संपत्तियां वक्फ को दान कर दी थीं, लेकिन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रयासों के कारण इन बेशकीमती 123 संपत्तियों को वक्फ के चंगुल में जाने से न केवल बचाया जा सका, बल्कि इसने वक्फ कानूनों में बदलाव के लिए एक मजबूत आधार भी दे दिया। 

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विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि 2014 में अप्रैल-मई महीने में देश में लोकसभा के चुनाव होने थे। लेकिन चुनावों की घोषणा होने के पहले 5 मार्च 2014 को मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने चुपचाप दिल्ली की 123 संपत्तियों को वक्फ को दान कर दिया। इसके बाद इसी दिन यानी 5 मार्च को ही केंद्रीय निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव अधिकारी वीएस संपत ने 5 मार्च को ही आम चुनावों की घोषणा की थी। 
 
लेकिन विहिप ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने गलत मंशा से चुनावों की घोषणा से ठीक पहले इन संपत्तियों को वक्फ को दान कर दिया था। इस मुद्दे पर विहिप के एक प्रतिनिधिमंडल ने 18 मार्च को चुनाव आयोग में जाकर इस फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विहिप ने इस निर्णय के संभावित असर से भी अधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद चुनाव आयोग ने उक्त गजट नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया। इसके बाद ही इन संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के चंगुल में जाने से बचाया जा सका।    
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विनोद बंसल ने कहा कि इसके पहले भी कांग्रेस सरकार ने इसी तरह चुपचाप इन संपत्तियों को वक्फ को दान कर दिया था। उनके अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ये संपत्तियां अवैध तरीके से आम चुनावों से ठीक पूर्व 27 मार्च 1984 को (आदेश संख्या J.20011/4/74.1-II के माध्यम से) मात्र एक रुपए के पट्टे पर वक्फ को दे दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की भेंट चढ़ीं इन संपत्तियों को बचाने हेतु विहिप को दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका संख्या WP(C)1512/1984 दायर करनी पड़ी थी।

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