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कोरोना के गंभीर खतरे के बीच कितना सही है होम आइसोलेशन का आइडिया? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Mon, 25 May 2020 05:51 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली में कुल 14053 मामले, 7006 एक्टिव केसों में 49 फीसदी यानी 3421 लोग होम आइसोलेशन में
  • होम आइसोलेशन के दौरान भी किसी एक्सपर्ट की देखरेख हमेशा सुनिश्चित होनी चाहिए
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कोविड वॉरियर्स - फोटो : PTI (File)
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विस्तार
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देश में कोविड मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी बीच सरकार लगातार यह बता रही है कि कोरोना से मरने वालों की संख्या बहुत कम है और कोरोना के मामलों में केवल गंभीर लोगों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है।
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सरकार अब कोरोना के माइल्ड लक्षण वाले या लक्षणहीन मरीजों को उनके घरों पर ही क्वारंटीन कर इलाज करने का रास्ता अपना रही है।

दिल्ली के कुल 7006 एक्टिव मामलों में लगभग 49 फीसदी लोग इस समय होम आइसोलेशन में हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे भारी संख्या में लोग ठीक हो रहे हैं और उन्हें अस्पताल तक आने की जरूरत नहीं पड़ रही है।

यह दावा कितना सही है? जहां ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं कि बीमार होने के कुछ घंटों के अंदर ही लोगों की जान तक चली जा रही है, लोगों को होम क्वारंटीन कर देना कितना उचित है?
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मेट्रो अस्पताल के सीनियर फिजिशियन कंसल्टेंट डॉक्टर अमित कुमार पांडेय कहते हैं कि यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि अभी तक कोरोना वायरस का बिल्कुल सटीक इलाज विकसित नहीं हो पाया है।

इसके बारे में विशेषज्ञों को भी अभी बहुत सीमित जानकारी है। ऐसे में जो कोरोना मरीज उनके सामने आ भी रहे हैं, वे उनका बहुत सीमित उपचार करने की स्थिति में हैं।

उनकी कोशिश संक्रमित व्यक्ति की अन्य बीमारियों को ठीक करने की होती है, जिससे कोरोना उसके ऊपर ज्यादा प्रभावशाली न हो सके।

अस्पताल में भी ऐसे मरीजों को क्वारंटीन करके रखा जाता है, जिससे वे स्वयं किसी अन्य संक्रमण की चपेट में न आएं और दूसरे मरीजों को संक्रमित न कर सकें। इस दौरान कुछ सामान्य दवाओं के जरिए उनका इलाज होता रहता है।

डॉक्टर अमित कुमार पांडेय के मुताबिक, यही कारण है कि लक्षणहीन या हल्के लक्षण वाले केसों में लोगों को उनके घरों में ही क्वारंटीन करके रखने का फैसला बिल्कुल सही है।

कई बार मरीजों को अस्पताल से ज्यादा सुरक्षा उनके घर पर ही मिल जाती है। वे वहां ज्यादा मानसिक संतुष्ट महसूस करते हैं जिसका सकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर उनके स्वस्थ होने पर पड़ता है।

लेकिन, इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट के निदेशक डॉक्टर अरुण मित्रा लोगों को उनके घरों पर ही क्वारंटीन कर उनका इलाज करने को बहुत सही फैसला नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि हमारे भारतीय घरों में एक ही कमरे में पूरा परिवार रहता है। एक ही टॉयलेट पूरा परिवार इस्तेमाल करता है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति को क्वारंटीन करके रखना संभव नहीं होगा।

यह केवल तभी कारगर हो सकता है जबकि पूरे परिवार में छोटे बच्चे न हों और कोरोना बीमार व्यक्ति को बिल्कुल अलग-थलग करके रखना संभव हो सके।

उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन के दौरान भी किसी एक्सपर्ट की देखरेख हमेशा सुनिश्चित होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो होम आइसोलेशन खतरा बन सकता है।

दिल्ली के लगभग आधे मरीज होम आइसोलेशन में

देश में कोरोना के कुल 138,845 मामले आ चुके हैं। इसमें 77103 एक्टिव केस हैं, तो 57720 लोग इलाज के बाद ठीक भी हो चुके हैं। जबकि कोरोना से 4021 लोगों की मौत हो गई है।

दिल्ली में कोरोना के कुल 14053 मामले सामने आए हैं। इनमें 7006 एक्टिव केस इस समय मौजूद हैं, 2053 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

मौजूदा केसों में केवल 187 संक्रमित लोगों को आईसीयू की जरूरत है, तो वेंटीलेटर पर केवल 29 लोगों का उपचार चल रहा है।

सामान्य या हल्के लक्षण मामलों वाले 3421 लोग (लगभग 49 फीसदी) होम आइसोलेशन में अपना इलाज करा रहे हैं। अब तक कोरोना से मौत के केवल 276 मामले सामने आए हैं जो कुल मामलों का केवल 1.96 फीसदी है।

 

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