अमरनाथ यात्रा के बारे में सबकुछ
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अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही। यात्रा से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का जायजा लिया। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस कठिन तीर्थयात्रा पर निकलते हैं, लेकिन यात्रा पर जाने से पहले पंजीकरण, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, यात्रा मार्ग, सुरक्षा नियम और जरूरी दिशानिर्देशों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि आप कैसे पहुंच सकते हैं अमरनाथ गुफा? यात्रा में श्रद्धालुओं को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं? अमरनाथ यात्रा के लिए कैसे पंजीकरण किया जा सकता है? इसकी पात्रता शर्तें क्या हैं? अमरनाथ यात्रा के दौरान क्या करें और क्या नहीं? यात्रा पर जाते समय क्या साथ रखें? और इस बार की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
कैसे पहुंच सकते हैं अमरनाथ गुफा?
इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस पवित्र गुफा मंदिर के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु दो आधिकारिक मार्गों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं।
पहला पारंपरिक पहलगाम मार्ग है, जिसमें जम्मू, पहलगाम, चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं। यह अपेक्षाकृत लंबा मार्ग है और रास्ते में कई पड़ाव व सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। इसकी दूरी 32 किलोमीटर है। इस मार्ग का बेस कैंप नुनवान (पहलगाम के पास), अनंतनाग जिले में स्थित है। यह श्रीनगर से सड़क मार्ग के जरिए करीब 90 किलोमीटर दूर है। इस मार्ग का यात्रा एक्सेस कंट्रोल गेट नुनवान से करीब 12 किलोमीटर दूर चंदनवाड़ी में स्थित है।
दूसरा बालटाल मार्ग है, जिसमें जम्मू, बालटाल, दोमेल और बरारी से होकर श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं। यह दूरी के लिहाज से छोटा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी होने के कारण इसे अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसकी दूरी 14 किलोमीटर है। इस मार्ग का बेस कैंप बालटाल (सोनमर्ग के पास), गांदरबल जिले में स्थित है। यह श्रीनगर से सड़क मार्ग के जरिए करीब 95 किलोमीटर दूर है। इस मार्ग का यात्रा एक्सेस कंट्रोल गेट बालटाल से करीब 2.5 किलोमीटर दूर दोमेल में स्थित है।
कैस करें ऑनलाइन पंजीकरण?
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अमरनाथ यात्रा के लिए कैसे करें पंजीकरण?
ऑनलाइन
अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
- एक मोबाइल नंबर से अधिकतम चार श्रद्धालुओं का पंजीकरण किया जा सकता है।
- आवेदन जमा करने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
- यात्रा के लिए अग्रिम ऑनलाइन पंजीकरण 3 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा। इसके बाद की तारीखों के लिए पंजीकरण बाद में उपलब्ध कराया जाएगा।
- पंजीकरण के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र आपके राज्य के अधिकृत डॉक्टर या अस्पताल से जारी होना चाहिए।
ऑफलाइन
- अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण भी करा सकते हैं।
- इसके लिए जम्मू में बनाए गए निर्धारित पंजीकरण केंद्रों से टोकन लेकर रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड प्राप्त किया जा सकता है।
- इसके अलावा, देशभर में एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक और जम्मू-कश्मीर बैंक की 500 से अधिक अधिकृत शाखाओं में भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
आरएफआईडी कार्ड क्यों जरूरी है?
अमरनाथ यात्रा 2026 में सभी श्रद्धालुओं के लिए आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य होगा। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद श्रद्धालुओं को जम्मू-कश्मीर के तय केंद्रों से बायोमेट्रिक ईकेवाईसी सत्यापन कराने के बाद यह कार्ड लेना होगा। आरएफआईडी कार्ड के बिना किसी भी श्रद्धालु को डोमेल या चंदनवाड़ी चेक पोस्ट से आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
मजबूत सुरक्षा व्यवस्था
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यात्रा पर जाते समय क्या साथ रखें?
अगर आप अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं, तो मौसम और कठिन ट्रैक को देखते हुए पहले से अच्छी तैयारी करना जरूरी है। यात्रा के दौरान ये जरूरी चीजें अपने साथ रखें:
- जरूरी दवाइयां रखें, जैसे बुखार, सिरदर्द, उल्टी की दवा। साथ में एक छोटी फर्स्ट एड किट और बैंडेज भी रखें।
- गर्म कपड़े जरूर ले जाएं, क्योंकि ऊंचाई पर मौसम अचानक ठंडा हो सकता है।
- रेनकोट या बरसाती, छाता और वाटरप्रूफ जूते साथ रखें, क्योंकि रास्ते में बारिश हो सकती है।
- सनस्क्रीन, धूप का चश्मा और टोपी रखें, ताकि तेज धूप से बचाव हो सके।
- रात या अंधेरे में जरूरत पड़ने पर टॉर्च या हेडलैंप काम आएगा।
- पहाड़ी रास्तों पर चलने में मदद के लिए ट्रैकिंग स्टिक साथ रख सकते हैं।
- सामान और मोबाइल को बारिश से बचाने के लिए वाटरप्रूफ बैग या कवर रखें।
- पहचान पत्र और यात्रा से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज हमेशा अपने पास रखें, क्योंकि रास्ते में कई जगह उनकी जांच हो सकती है।
कैसे ही सुरक्षा व्यवस्था?
- जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां लगातार मॉक ड्रिल कर रही हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
- पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों, ट्रांजिट कैंप, बेस कैंप और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा अभ्यास किया जा रहा है।
- सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, अन्य सुरक्षा बल, स्वास्थ्य विभाग, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और सिविल प्रशासन संयुक्त रूप से इन अभ्यासों में हिस्सा ले रहे हैं।
- अभ्यास के जरिए विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, संचार व्यवस्था, रेस्क्यू और निकासी की प्रक्रिया को परखा जा रहा है।
- नुनवान बेस कैंप में अमरनाथ यात्रा की महिला तीर्थयात्रियों की तैलाशी और कतार प्रबंधन के लिए महिला सीआरपीएफ कर्मी तैनात हैं।
- पूरे यात्रा मार्ग पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम और हाईटेक निगरानी नेटवर्क तैनात किया गया है।
- इनका उद्देश्य यह है कि यात्रा के दौरान किसी भी संकट की स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत और सुरक्षित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।