भारतीय जनता पार्टी जब भी कोई चुनाव हारती है, तब कभी सामने - तो कभी छिपे तौर पर, भाजपा नेता यह स्वीकार करते हैं कि क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई थी। कार्यकर्ता स्थानीय पार्टी नेतृत्व से नाराज था जिसके कारण वह अपने घरों से नहीं निकला और पार्टी चुनाव हार गई। हाल ही में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भी यही बात कही गई थी। लेकिन इन समीक्षाओं के बाद पार्टी ने इस विषय पर कभी कोई संज्ञान लिया हो, या कार्यकर्ताओं की परेशानियां दूर करने के लिए कोई ठोस नीति बनाई हो, ऐसा कार्यकर्ताओं को नहीं लगता।
अब जब कि भाजपा को एक बार फिर लोकसभा चुनाव का सामना करना है, और उसके सामने नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की कठिन चुनौती है, कुछ क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गई है। खबर है कि उत्तरप्रदेश में पार्टी कार्यकर्ता स्थानीय नेतृत्व से खासा नाराज है। बताया जा रहा है कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी पार्टी कार्यकर्ताओं की बात गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पार्टी का उच्च नेतृत्व भी उसकी शिकायतों पर कान देने को तैयार नहीं है जिसकी वजह से वह कोई काम नहीं करा पा रहा है।
ऐसे में कार्यकर्ता निराश है और इसका खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। एक कार्यकर्ता ने कहा कि उन्हें जब भी कोई परेशानी होती है, और वे इसे पार्टी नेताओं को बताते हैं तो वे उन्हें राष्ट्रवाद, हिंदू संस्कृति और प्राचीन महान परंपरा की बात करते हैं। लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि राष्ट्रवाद की घुट्टी के सहारे लंबे समय तक जनता को बांधा नहीं जा सकता। इसके लिए जमीनी स्तर पर लोगों के काम करने होते हैं।
अमित शाह ने दिया था कार्यकर्ताओं को भरोसे में लेने का निर्देश
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कुछ ही दिन पूर्व उत्तरप्रदेश के भाजपा सांसदों की एक बैठक ली थी। यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद और बजट पूर्व हुई इस बैठक में अमित शाह ने सांसदों को स्पष्ट रुप से कहा था कि अगर उनका कार्यकर्ता संतुष्ट होगा तो उत्तरप्रदेश की लड़ाई उनके लिए मुश्किल नहीं होगी। बैठक में उपस्थित पूर्वांचल के एक सांसद ने कहा कि शाह ने विश्वास व्यक्त किया था कि वे सपा-बसपा के गठबंधन का जवाब अपने कार्यकर्ताओं के बल पर देने की क्षमता रखते हैं, इसलिए बिना किसी हार-जीत की चिंता किए सांसद अपने कार्यकर्ताओं से जुड़ें और उन्हें मेहनत करने के लिए प्रेरित करें।
अमित शाह तक पहुंची ये बात
जानकारी के मुताबिक पूर्वांचल के कुछ कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के पास यहां तक बात रखी थी कि अगर वे अपने क्षेत्र में अपने कहने पर एक हैंडपंप, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना दिलाने की हैसियत भी नहीं रखेंगे तो चुनाव के समय उनकी बातों पर आकर कोई वोट देने क्यों आएगा। बताया गया है कि शाह ने कार्यकर्ताओं को इस मामले को गंभीरता से लेने के लिए कहा था। लेकिन जानकारी के मुताबिक आज भी कार्यकर्ताओं के कहने पर कोई भी काम नहीं हो रहे हैं जिसके कारण उनकी नाराजगी पार्टी से बढ़ती जा रही है।
'अपना दल जैसे सहयोगी दलों की समस्या भी यही'
अपना दल भाजपा से नाराज बताया जा रहा है। पार्टी प्रवक्ता अरविंद शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि हमें वोट देने वाली जनता, हमारे कार्यकर्ता बेहद ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। उनके काम थाने से लेकर ब्लॉक, तहसील या जिले स्तर के ही होते हैं। इस स्तर पर वाजिब काम कराने के लिए भी उन्हें बार-बार अधिकारिय़ों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे उनकी समस्या बढ़ती जा रही है। अरविंद शर्मा ने कहा कि उन्हें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन राज्य स्तर के नेता उनके लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए जरा भी रुचि नहीं लेते जिसके कारण उनके कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ रहा है।
'हम सपा-बसपा नहीं बन सकते'
पार्टी कार्यकर्ताओं की इन शिकायतों को कुछ हद तक सही मानते हुए उत्तरप्रदेश भाजपा के एक शीर्ष नेता ने कहा कि कार्यकर्ताओं के वाजिब काम अवश्य कराए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर शिकायत सही हो सकती है। लेकिन भाजपा खुद उसी तरह की संस्कृति का पोषण नहीं कर सकती है जिसका विरोध वह खुद करती आई है। नेता ने कहा कि जनता सपा-बसपा के कार्यकर्ताओं की गुंडेगर्दी से त्रस्त थी। वे थानों में बैठकर हर काम करने का 'निर्देश' देते थे। ऐसे में अगर हम भी वही काम करने लग जाएंगे तो जनता हमें उनसे 'अलग' कैसे समझेगी।