आरबीआई की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि महंगा परिवहन, लंबी दूरी, घरेलू जिम्मेदारियां और सुरक्षा की चिंता महिलाओं के रोजगार में बड़ी बाधा हैं। राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण के मुताबिक, कामकाजी महिलाओं में 41.9 फीसदी ही नौकरी के लिए कम से कम एक किलोमीटर की यात्रा करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 61.9 फीसदी है। रिपोर्ट के अनुसार, मुफ्त बस यात्रा योजनाओं से महिलाओं के लिए रोजगार पाना और नौकरी बरकरार रखना आसान हुआ है।
महिलाओं के रोजगार की राह में ‘आवागमन’ बड़ी बाधा बन कर उभरा है और मुफ्त बस यात्रा की सुविधा उनके सवैतनिक रोजगार में बढ़ोतरी का कारण बनती है। लंबी दूरी, यात्रा का खर्च, घरेलू जिम्मेदारियां और सुरक्षा की चिंता महिलाओं के लिए काम तक पहुंचने में बड़ी बाधाएं हैं।
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रिजर्व बैंक की बृहस्पतिवार को जारी आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में यह निष्कर्ष आया है। इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण व आईआईटी बॉम्बे के 2026 के सर्वेक्षण के हवाले से कहा है कि महंगा सफर, सुरक्षा की चिंता और घरेलू बोझ के चलते महिलाओं की नौकरी तक पहुंच सीमित हो जाती है। इन्हीं वजहों से महिलाओं को अपेक्षाकृत महंगे परिवहन साधन चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
मुफ्त बस यात्रा से बढ़े रोजगार के अवसर
तमिलनाडु की विदियाल पयनम, कर्नाटक की शक्ति, आंध्र प्रदेश की स्त्री शक्ति, केरल की प्रियदर्शिनी और तेलंगाना की महालक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा है। इनके लिए रोजगार पाना या बरकरार रखना अपेक्षाकृत आसान है।
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पुरुषों से 20% कम महिलाएं करती हैं काम के लिए यात्रा
राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण 2025-26 के निष्कर्ष बताते हैं कि कामकाजी महिलाओं का केवल 41.9% हिस्सा काम पर जाने के लिए कम से कम एक किलोमीटर की यात्रा करता है, जबकि पुरुषों में यह अनुपात 61.9 प्रतिशत है। दोपहिया वाहन कामकाजी लोगों का सबसे बड़ा सहारा है।