बीते कुछ हफ्तों में देखते ही देखते सैनिटाइजर की बिक्री चौगुनी रफ्तार से बढ़ गई। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में सैनिटाइजर को एक अहम औजार माना गया। शुरुआत से ही लोगों को साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोने की सलाह दी जाती रही। हालांकि एक नई बहस भी शुरू हो चुकी है कि वायरस से लड़ने के लिए साबुन या सैनिटाइजर में से क्या ज्यादा बेहतर है। वैसे वायरस को मारने में अल्कोहल का कार्य सामान्य साबुन की तुलना में बेहतर है। बस यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस सैनिटाइटर का उपयोग आम कर रहे हैं, उसमें अल्कोहल का मात्रा 60% या अधिक होनी चाहिए।
AIIMS में माइक्रोबायोलॉजी की पूर्व प्रोफेसर डॉ. शोभा ने समझाया, 'कोरोना वायरस में lipid envelope होता है। साबुन डिटर्जेंट lipid को नष्ट कर देता है। अल्कोहल के लिए भी यही सच है। आप यह भी देखते हैं कि जब संक्रमित व्यक्ति खांसता है, तो वायरस बूंदों के माध्यम से बाहर निकलता है। बाहर निकलकर वायरस ठोक सतह पर कई घंटे जीवित भी रहता है। सैनिटाजइर में होने वाला अल्कोहल इसी विषाणु को मारने का काम करता है।
यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने वायरस के आकार और उसकी संरचना के बारे में बताया। अन्य वायरस की तरह ही, कोरोना वायरस के कण गोलाकार होते है उनमें प्रोटीन होते हैं, जिन्हें स्पाइक्स कहा जाता है जो उनकी सतह से फैलते हैं। ये स्पाइक्स मानव कोशिकाओं को निष्क्रिय करते हुए अधिक से अधिक वायरस का निर्माण करते हैं।
यह सब एक मोटी परत की मदद से होता है, जिसे envelope कहते हैं। यह वह परत है जो 60% से अधिक अल्कोहल वाले साबुन या सैनिटाइजर के संपर्क में आते ही खत्म होने लगती है, लिफाफे के envelope से वायरस पहले की ही तरह हो जाते हैं और उनका खात्मा होने लगता है। यही कारण है कि दुनियाभर के विशेषज्ञ और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान इस बात से सहमत हैं कि कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने से COVID-19 के फैलने का खतरा कम करेगा।