केंद्रीय सूचना आयोग ने राज्यसभा सचिव से पूछा है कि आखिर किस तरह से हैदराबाद हाईकोर्ट के जज सीवी नागार्जुन रेड्डी के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन होगा? यह सवाल मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर ने एस मलेश्वर राव की याचिका पर हाल पर पूछा।
अपनी आरटीआई याचिका में राव ने राज्यसभा के उन सदस्यों की संख्या की जानकारी मांगी है जिन्होंने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया और उसे पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने अन्य लोगों के साथ सदस्यों की भागीदारी के संबंध में नियम-कानून की जानकारी मांगी।
राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों ने कहा कि राव को कुछ जानकारियां दी गईं लेकिन प्रस्ताव पेश करने से संबंधित रिकॉर्ड, प्रस्ताव को समर्थन न देने वाले लोगों के नामों आदि की जानकारी नहीं दी गई। ये जानकारयां सदन के महासचिव के तहत होती हैं जिन्हें कभी भी सार्वजनिक नहीं किया जाता है।
माथुर ने संसदीय विशेषाधिकार को रेखांकित किया और राज्यसभा के केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी को सूचना देने का निदेेर्श दिया। वे सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से लिखित में बताएंगे कि इस सूचना के खुलासे आखिर किस संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन होगा।