कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान दे रहे लोगों पर हुए हमलों को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना रुख पहले ही साफ कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर कोई भी व्यक्ति पुलिस या स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करता है तो उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाएगी। दरअसल पहले इंदौर और फिर हाल ही में रामपुर, मेरठ, मुजफ्फनगर और अलीगढ़ जैसे शहरों में मेडिकल टीम पर कुछ शरारती तत्वों ने हमला किया था, जिसे देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई की बात कही थी।
सीएम योगी ने साफ कहा था कि इंदौर और कर्नाटक जैसी घटना उत्तर प्रदेश में न हो, इसके लिए जरूरी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाए। ऐसे में अगर आप सोच रहे हैं कि यह रासुका क्या है और इससे क्या फर्क पड़ेगा, तो आज हम आपको इससे जुड़ी हर छोटी और बड़ी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।
क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका)?
23 सितंबर, 1980 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) अस्तित्व में आया। यह कानून इंदिरा गांधी की सरकार के कार्यकाल में लाया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 के तहत अगर सरकार को लगता है कि कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था में अड़चन पैदा कर रहा है, तो उसके खिलाफ एनएसए या रासुका लगाया जा सकता है। इसके अलावा अगर सरकार को लगे कि किसी जरूरी सेवा की आपूर्ति में कोई भी व्यक्ति बाधा डाल रहा है, तो उसके खिलाफ भी रासुका (एनएसए) लगाया जा सकता है।
बिना आरोप होती है गिरफ्तारी
अगर सरकार किसी व्यक्ति के खिलाफ रासुका लगाती है तो उसे बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। इस दौरान राज्य सरकार को केवल यह बताने की जरूरत है कि व्यक्ति को रासुका के तहत हिरासत में लिया गया है। वहीं, संदिग्ध व्यक्ति को बिना आरोप तय किए 10 दिनों के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। इस दौरान वह व्यक्ति हाईकोर्ट के सलाहकार बोर्ड के सामने अपील कर सकता है, लेकिन उस व्यक्ति को मुकदमे के दौरान वकील की इजाजत नहीं है।
कानून का सीमित इस्तेमाल
रासुका का इस्तेमाल राज्य सरकारें, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त अपने सीमित अधिकार में कर सकती हैं।
क्या है रासुका की पूरी प्रक्रिया
- रासुका के तहत किसी भी व्यक्ति को सबसे पहले 3 महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है।
- एकबार में केवल तीन महीने की ही गिरफ्तारी हो सकती है।
- इसके बाद तीन-तीन महीने कर गिरफ्तारी की अवधि को बढ़ाया जा सकता है।
- गिरफ्तारी के बाद अधिकारी को राज्य सरकार को बताना होता है कि किस आधार पर उसने गिरफ्तार किया है।
- जब तक राज्य सरकार से गिरफ्तारी का अनुमोदन (अप्रुवल) नहीं मिल जाता, तब तक गिरफ्तारी केवल 12 दिन तक की हो सकती है।
- अगर 5 से 10 दिन में अधिकारी जवाब दाखिल कर दे, तो गिरफ्तारी की अवधि सरकार के अप्रुवल तक 12 की जगह 15 दिन तक बढ़ सकती है।
कोरोना को लेकर कौन तय करेगा रासुका
कोरोना वायरस को लेकर किसी भी व्यक्ति पर रासुका लगेगा या नहीं यह इस बात पर तय करेगा,
- अगर कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को लापरवाही में संक्रमित कर दे।
- अगर कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति जानबूझ कर किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर दे।
मौजूदा समय में अगर कोई व्यक्ति इन दो में से किसी भी एक मामले में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ रासुका लग जाएगी। ऐसे में उस व्यक्ति को जमानत नहीं मिलेगी। इस बीच केवल रासुका बोर्ड यह तय करेगा कि इस मामले में किसी व्यक्ति पर रासुका लगेगा या नहीं। अगर बोर्ड की तरफ से मना कर दिया जाता है, तो रासुका लगने के बाद भी व्यक्ति छूट जाएगा।