इराक में स्प्रे करते हुए स्वास्थ्यकर्मी
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कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए तरह-तरह के एहतियाती कदम उठा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के प्रोफेसर पाल थोरार्डसन के दावा किया है कि साबुन द्वारा हाथ को साफ कर कोरोना के वायरस से बचा जा सकता है।
कोरोनावायरस में तीन प्रमुख अवयव होते हैं। पहला आरएनए, दूसरा प्रोटीन और तीसरा वसा है। यह वायरस इन तीन अवयवों से मिलने से बना है। वसा कोरोना के वायरस के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है और इसके अन्य अवयवों को साथ रखने में मदद करता है। लेकिन, वसा की बाहरी परत इस वायरस की सबसे कमजोर कड़ी है।
इस वायरस के अंदर कोई ऐसी मजबूत कड़ी नहीं है जो आरएनए, प्रोटीन और वसा को आपस में जोड़कर रख सके। इसलिए इस वायरस को बिना किसी नुकसानदायक केमिकल की मदद स तोड़ा जा सकता है।
कोरोनावायरस 50 से 200 नैनोमीटर के बीच होते हैं। खांसी और छींक की छोटी बूंदें सतह पर आते ही सूख जाती है लेकिन, इसके वायरस सक्रिय होते हैं। ये वायरस लकड़ी, कपड़े और त्वचा पर कई दिनों तक सक्रिय रह सकते हैं। इसके विपरीत स्टील, चीनी मिट्टी के बर्तन और टेफ्लॉन जैसे सतहों पर यह ज्यादा समय तक सक्रिय नहीं रहते हैं।
साबुन कैसे है प्रभावी
ज्यादातर लोग हर 2-5 मिनट में एक बार अपने चेहरे को छूते हैं। जब वायरस आपके हाथ में चिपका हो तब आप अगर अपना चेहरा छू लें तो उन्हें संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में हाछ को सिर्फ पानी से धोना पर्याप्त नहीं है क्योंकि कोरोनावायरस चिपचिपा होता है और पानी से साफ नहीं होता है।
वहीं, साबुन का पानी में वसा जैसे पदार्थ होते हैं जिन्हें एम्फीफाइल कहा जाता है। साबुन वायरस और त्वचा की सतह के बीच के पकड़ को कमजोर करता है। साबुन के पानी से हाथ धोने से वायरस की बाहरी परत में सेंध लगती है और वायरस पानी के साथ मिलकर हाथ से निकल जाता है।