अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2024 में भारत और अमेरिका के बीच 129 बिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार हुआ। यह व्यापार भारत के पक्ष में झुका हुआ है। भारत अमेरिका को आभूषण, इलेक्ट्रिकल वस्तुएं, फार्मास्युटिकल उत्पाद, खनिज तेल, खाद्य उत्पाद, फल-सब्जी निर्यात करता है। वहीं, भारत अमेरिका का दसवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत भी अमेरिका से खनिज तेल, आभूषण, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, मशीनरी और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी वस्तुओं का आयात करता है।
अमेरिका के तीन सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार मेक्सिको, कनाडा और चीन हैं। वह इन देशों से अपनी आवश्यकता का सबसे अधिक सामान आयात करता है। इसमें आभूषण, मशीनरी, सेवाओं से लेकर खाद्य वस्तुओं और कपड़ों का सामान भी शामिल है। डोनाल्ड ट्रंप इन पर 25 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का प्रस्ताव कर चुके हैं। इससे अमेरिका में इन देशों से आने वाली इन्हीं वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी। यदि मामला केवल इन्हीं देशों तक सीमित रहता तो यह मामला भारत के पक्ष में हो सकता था क्योंकि अपने सस्ते उत्पादों के कारण अमेरिकी उपभोक्ता के पास इन्हीं क्षेत्रों के भारतीय उत्पादों को खरीदने का विकल्प रहता। इससे भारत को लाभ होता।
चूंकि, ट्रंप ने एलान किया है कि वे भारत की वस्तुओं पर भी इसी तरह का टैरिफ लगाएंगे, ऐसे में भारतीय उत्पादों का भी अमेरिकी बाजार में महंगा होना तय है। इसका सबसे बड़ा असर यह पड़ने की संभावना है कि अमेरिका में मेक्सिको, कनाडा और चीन सहित भारत से भी आने वाली वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। इससे गरीब अमेरिकी उपभोक्ता आवश्यक वस्तुओं की खरीद और उपभोग में कमी कर सकता है। इसका भारत सहित अमेरिकी व्यापार से जुड़े सभी देशों को नुकसान होगा।
वैश्विक मंदी का कारण बनते जा रहे ट्रंप
ट्रंप के इस तुगलकी निर्णय का सबसे बड़ा असर यही होगा कि पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ सकती है। ट्रंप के टैरिफ वॉर के कारण अमेरिका में वस्तुएं महंगी होंगी। इससे आम अमेरिकी उपभोक्ता खपत में कटौती करेगा और जिन देशों से इन वस्तुओं का आयात होता है, वहां इनका उत्पादन कम करना पड़ेगा।
मैक्सिको, कनाडा, चीन और भारत जैसे देशों में उत्पादन में कमी होने का सीधा असर रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा। अप्रत्यक्ष रोजगार सीधे तौर पर तुरंत प्रभावित होंगे, जबकि फिक्स नौकरियों पर भी देर-सबेर इसका असर होगा। इन देशों में रोजगार के अवसर कम होने से लोगों के हाथों में खर्च करने के लिए पैसा नहीं होगा और इन देशों के आंतरिक बाजार में भी खपत-मांग में कमी हो जाएगी। यह इन देशों में बेरोजगारी, मंदी और महंगाई को बढ़ाएगा। यानी एक-एक कर पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आएगी और इसका सबसे बड़ा कारण ट्रंप का तुगलकी फैसला होगा।
महंगाई भी बढ़ेगी
ट्रंप के टैरिफ वार का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों में देखा जा रहा है। पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में तूफान आया हुआ है। शेयरों में निवेश करने वालों का भारी नुकसान हो रहा है। ट्रंप के टैरिफ वॉर के कारण डॉलर मजबूत हो रहा है। लोग निवेश के लिए डॉलर और सोने की भारी मात्रा में खरीद कर रहे हैं। इससे रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। रुपये के कमजोर होने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होगी और अंततः यह महंगाई को और ज्यादा बढ़ाएगी।
भारत इस असर से कैसे बच सकता है?
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि भारत के पास अभी भी ऐसे कई विकल्प उपलब्ध हैं जिसका उपयोग कर वह इस टैरिफ वॉर का नुकसान कम करने का प्रयास कर सकता है। हमारे पास दूसरे देशों की परिस्थितियों को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है, लेकिन यदि हम आंतरिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से नियोजित करें तो टैरिफ वॉर और मंदी के बड़े नुकसान से बच सकते हैं। भारत ने 2007 में यही किया था।
प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि हमारी पूरी कोशिश यह होनी चाहिए कि इस दौरान भी हमारी आंतरिक मांग-उपभोग की स्थिति कमजोर न पड़े। इसके लिए हमें महंगाई पर नियंत्रण करना होगा। रुपये के कमजोर होने से महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को ब्याज दर बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रित करना होगा। लेकिन उसे यह ध्यान रखना होगा कि इससे निवेश प्रभावित न हो।
आरबीआई को अप्रत्यक्ष करों को कम कर देना चाहिए जिससे लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा रहे और आंतरिक मांग कमजोर न पड़ने पाए। भारत को लेबर इंसेंटिव कदम उठाकर ज्यादा से ज्यादा हाथों को काम देने की कोशिश करनी चाहिए। इससे लोगों के पास रोजगार रहेगा और आय बनी रहने पर वे खर्च करेंगे और अर्थव्यवस्था कमजोर नहीं पड़ने पाएगी।
भारत के दूसरे देशों से व्यापार पर भी असर
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ का असर केवल भारत पर ही नहीं, स्वयं अमेरिका और यूरोप के साथ-साथ एशियाई देशों पर भी पड़ेगा। ट्रंप के फैसले से दूसरे देशों में महंगाई बढ़ेगी, इससे उनके उत्पाद महंगे होंगे तो इसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। बहुत संभावना है कि देर-सबेर ट्रंप प्रशासन को इस टैरिफ वॉर का नुकसान समझ आए और उसे रोल बैक करना पड़े।
भारत का बड़ा एक्सपोर्ट यूरोप, मिडिल ईस्ट और अन्य देशों को होता है। यदि टैरिफ वॉर का नुकसान बढ़ा तो दूसरे देशों में भी मंदी आएगी। इससे भारत का इन देशों को होने वाला व्यापार भी प्रभावित होगा। इससे बचने के लिए भारत के पास केवल आंतरिक बाजार को मजबूत बनाए रखने का विकल्प है। यदि भारत आंतरिक तौर पर मजबूत बना रहा तो इससे वह मंदी का ज्यादा कुशलतापूर्वक सामना कर पाएगा।