24 साल की पिंकी विधवा हो चुकी हैं। उनकी सास देवकी देवी के पति कुछ साल पहले गुजर गए। इस बाढ में बीते रविवार को उनका बेटा भी डूब गया। बिहार में भागलपुर जिले के सबौर ब्लॉक के राजेंदीपुर गांव में बाढ के कारण तीन मौत हुई हैं।
इनमें एक थे दिलीप। दूसरे देवकी के बेटे और तीसरे पिंकी के पति। देवकी के घर में अब कोई कमाउ मर्द नहीं बचा। एक छह साल का बेटा है। अपनी मां पर आश्रित। पिंकी की गोद में भी डेढ साल की बेटी है शिवानी। इन लोगों ने सबौर उच्चविद्यालय के बाढ राहत शिविर में पनाह लिया है।
स्कूल के मैदान में प्लास्टिक के छज्जे वाले अस्थायी तंबू के नीचे। साथ में कुछ बकरियां भी हैं। इस राहत शिविर में जिंदगी की कडवी सच्चाई को बयां करते ऐसे कई लोग हैं। पिंकी कहती हैं कि उनके पति के मर जाने के बाद अब उनकी जिंदगी कैसे चलेगी। उन्हें कौन कमा कर देगा। बच्चों की परवरिश कौन करेगा।
झारखंड के गोड्डा जिले के खट्टी समनपुर गांव में पिंकी की शादी 12 साल पहले राजेंदीपुर के दिलीप रजक से हुई थी। तब वे बहुत छोटी थीं। अब जब बडी हुईं तो गंगा ने उनसे उनका पति छीन लिया।
पिंकी की सास देवकी देवी भी रो रही हैं। उन्होंने बीबीसी से कहा कि अब वे घर कैसे चलाएंगी। फिक्र इसी की है। एक तो छोटा बेटा, दूधमुंही पोती और विधवा बहू। इन सबके लिए कमाने वाला तो भंवर में फंसकर डूब गया।