दोनो पक्षों में बातचीत शुरू ही हुई थी कि वह गरमागरमी में बदल गई। उसके बाद भारतीय जवानों ने उनके तंबुओं को उखाड़ना शुरू कर दिया। इस पर पहले से तैयार चीनी सैनिकों ने भारतीय दल पर धावा बोल दिया और उनके निशाने पर बिहार रेजिमेंट के कमांडर और हवलदार पलानी आ गए। जैसे ही कमांडिंग ऑफिसर नीचे गिरे, बिहारियों ने अपना आपा खो दिया और संख्या में कम होने के बावजूद उन्होंने चीनी सैनिकों को बेरहमी से पीटना शुरू किया। वह खूनी संघर्ष करीब तीन घंटे तक चला, जिसमें कई चीनी जवान या तो मारे गए, या बुरी तरह जख्मी हो गए।
झड़प की अगली सुबह जब हालात थोड़े सामान्य हुए, चीनी जवानों के शव जमीन पर पड़े थे, जिन्हें भारतीय दल ने दूसरे पक्ष के सुपुर्द कर दिया। सूत्रों ने बताया कि भारत की ओर से 100 जवान, जबकि चीन के 350 सैनिकों की भिड़ंत हुई थी। अंतत: बिहार रेजिमेंट को पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर चीनी टेंट को उखाड़ने में कामयाबी मिल गई। उन्होंने बताया कि करार का उल्लंघन करते हुए चीनियों ने वहां तंबू गाड़े थे। बताया जाता है कि हालात को शांत करने के लिए अगले कुछ दिनों में फिर से पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर दोनों देशों में लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता होगी।