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जानिए कितना बड़ा है जाकिर नाइक का साम्राज्य?

Fri, 02 Dec 2016 09:34 AM IST
ज़ुबैर अहमद/ बीबीसी संवाददाता, मुंबई
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जाकिर नाइक
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कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा के वहाबी कहलाने वाले मुसलमानों का यकीन है कि इस्लाम का सबसे सुनहरा दौर पैगम्बर मोहम्मद और उनके बाद के चार शासकों का था। वो उसी दौर में वापस जाने की मांग करते हैं। इस विचारधारा का ये भी मानना है कि एक सच्चा मुसलमान वही है जो इस्लाम की सर्वोच्चता को माने और इसका प्रचार करे। उन पर इल्जाम है कि इस्लाम की अपनी समझ को वो सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।
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सालों पहले मुंबई का एक डॉक्टर दक्षिण अफ्रीका के एक इस्लामी प्रचारक अहमद दीदात से मिला। इस मुलाकात ने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। जाकिर नाइक ने अपने गुरु दीदात की तरह इस्लाम के प्रचार का बीड़ा उठाया।

उन्होंने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) की स्थापना की। अपने भाषणों को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए पीस टीवी नाम से टीवी चैनल शुरू किया। इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने के लिए स्कूलों की स्थापना की।
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एक जुलाई को ढाका में हुए चरमपंथी हमले के बाद जाकिर नाइक सुर्खियों में आ गए। धारणा बनी कि उनके भाषणों से मुस्लिम युवा प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से कुछ चरमपंथ के रास्ते पर चल पड़े हैं। हालांकि नाइक इस धारणा को गलत बताते हैं।

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईआरएफ पर पाबंदी लगा दी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फाउंडेशन और नाइक से जुड़े दूसरे दफ्तरों में छापे माकर उन्हें सील कर दिया। नाइक ने आईआरएफ पर लगी पाबंदी को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। आइए जानते हैं कि कितना बड़ा है जाकिर नाइक का साम्राज्य?

जाकिर नाइक के स्कूल में उर्दू नहीं अंग्रेजी में होती है पढ़ाई

अधिकारियों ने इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल का बैंक अकाउंट बंद किया - फोटो : bbc
मुंबई के मजगांवन इलाके में ऊंची दीवारों और बड़े दरवाजे से घिरे इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल को चलाने वाली संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन एजुकेशनल ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं जाकिर नाइक।

वो आईआरएफ के भी अध्यक्ष हैं। इस पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है। स्कूल पर कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन स्कूल के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। जाकिर नाइक पर चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत फैलाने का इल्जाम है।

इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल के बच्चे कहते हैं कि लोगों को उनके स्कूल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। स्कूल में कैम्ब्रिज इंटरनेशनल बोर्ड - IGCSE पाठ्यक्रम चलता है, जहाँ पढ़ाई अंग्रेजी में होती है। इस स्कूल में इस्लाम की तालीम भी दी जाती है। स्कूल के बच्चे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं।
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भाषणों की डीवीडी और सीडी से होती है कमाई

इसेलामिक इंटरनेशनल स्कूल की छात्राएं - फोटो : bbc
इस स्कूल की शाखाएं चेन्नई और दुबई में भी हैं। इसे जाकिर नाइक ने अपनी इमेज में ढालने की कोशिश की है। वो खुद अक्सर अंग्रेजी में भाषण देते हैं और टाई सूट के साथ टोपी लगाते हैं और दाढ़ी रखते हैं। उन्होंने अपनी छवि ऐसी बनाई है कि पारंपरिक और आधुनिक मुसलमानों में उनकी स्वीकृति हो।

जाकिर नाइक की कमाई फाउंडेशन के जरिए बिकने वाली इस्लाम पर लिखी उनकी किताबें और उनके भाषणों की डीवीडी और सीडी से होती है।

उन्होंने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसके कुछ साल बाद ही उन्होंने अपने भाषणों को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए पीस टीवी की शुरुआत की। इसका मुख्य कार्यालय दुबई में है। मुंबई के डोंगरी मोहल्ले में आईआरएफ के एक दर्जन से भी अधिक दफ्तर हैं।

पीस चैनल के भारत में प्रसारण पर रोक है। लेकिन दुबई में यह चैनल अभी भी चल रहा है। खाड़ी देशों में इस्लाम फैलाने का उनका काम जारी है। भाषण देने के लिए वो आज भी अफ्रीका का दौरा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर डॉक्टर जाकिर नाइक भारत नहीं भी लौटे तो भी भारत से बाहर उनका काम चलता रहेगा।
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