स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी (एसआईआर) को लेकर सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इंडिया गठबंधन के नेताओं की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी। इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने उम्मीद जताई है कि अदालत इस मामले में अनुकूल फैसला सुनाएगी। उनका कहना है कि इस मामले में सिर्फ मतदाता सूची का मुद्दा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
'सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की उम्मीद'
जॉन ब्रिटास ने सुनवाई से पहले समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सकारात्मक फैसले की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस की हिरासत के दौरान उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। ब्रिटास के मुताबिक, उन्हें जबरन गाड़ी तक घसीटकर ले जाया गया और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने भी उन्हें परेशान किया।
सीजेआई को लिखी चिट्ठी पर भी होगी सुनवाई
ब्रिटास ने बताया कि उन्होंने अपने साथ हुई घटनाओं की जानकारी देते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखा था। उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया कि उनके पत्र को इंटरलोक्यूटरी याचिका में बदलकर इंडिया गठबंधन के नेताओं की याचिका के साथ जोड़ दिया गया। उनका कहना है कि विपक्ष इस लड़ाई को अदालत और राजनीतिक मंच, दोनों जगह आगे बढ़ाएगा।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
माकपा सांसद ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), चुनाव आयोग के कामकाज और दिल्ली पुलिस की कथित मनमानी जैसे मुद्दों पर भी गौर करेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है। ब्रिटास के मुताबिक, अदालत पहले भी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर चुकी है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी सभी पहलुओं पर विचार होगा।
राहुल गांधी समेत 13 नेताओं ने दायर की याचिका
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के 12 अन्य नेताओं ने यह याचिका दायर की है। याचिका 12 अक्तूबर को दाखिल हुई थी और शुरुआती प्रक्रियागत कमियों को दूर करने के बाद 13 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज की गई। इसका मामला W.P.(C) No. 001351/2026 के रूप में दर्ज है।
ये भी पढ़ें:
'क्या न्याय मांगना अपराध है?': अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत पर भड़के खरगे, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत कार्रवाई पर सवाल
यह कानूनी चुनौती विपक्षी नेताओं के ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के कुछ दिनों बाद सामने आई है। विपक्ष ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग की है कि चुनाव आयोग के फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप हैं या नहीं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत इन सवालों पर क्या रुख अपनाती है।