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बैन के बाद भी गुजरात के इस गांव में बिक रही शराब

Tue, 27 Sep 2016 01:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुजरात के वरेली गांव को साड़ी और प्रवासी मजदूरों के लिए जाना जाता है। गुजरात को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-8 पर स्थित वरेली गांव की आबादी 50 हजार है। इनमें ज्यादातर प्रवासी हैं।  यह वहीं गांव है जहां पिछले कुछ दिनों में जहरीली शराब से 23 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों के परिजनों का कहना है कि शराबबंदी के बाद भी यहां आसानी से कच्ची शराब मिल जाती है, जिसके कारण ये मौतें हो रही हैं।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, गांव के पहले प्रवासी सरपंच धनीराम दुबे कहते हैं कि 12 घंटे नौकरी करने के बाद मजदूर थक जाते हैं और इसके बाद वह सिगरेट, तंबाकू, शराब और गांजा के आदी हो जाते हैं। यहां और बगल के गांवों में देश में बनने वाली शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। जहरीली शराब से मरने वालों में ज्यादातर प्रवासी ही हैं।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने पिछले महीने में होने वाली मौतों और कच्ची शराब को बेचने वाले रैकेट की जांच की जिम्मेदारी आतंकवाद निरोधक दस्ते को सौंपी है। इस मामले में पुलिस ने 14 लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें ज्यादातर लोकल हैं। 
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रामू यादव सहित गिरफ्तार अंतिम तीनों व्यक्ति पर 65 (A) के तहत बॉम्बे प्रॉबिशन  (गुजरात सरकार) के अंतर्गत मौत की सजा मुकर्रर की है। बताते चलें कि साल 2009 में जहरीली शराब पीने की वजह से 136 लोग मारे गए थे। इसके बाद राज्य सरकार गुजरात विधानसभा में एक संशोधन विधेयक लेकर आई थी जिसमें जहरीली शराब बनाने और बेचने वालों के लिए मौत की सजा का प्रावधान था।
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पुलिस ने दिए हैं जांचे के आदेश

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विपक्ष के प्रदर्शन के बाद सूरत के पुलिस चीफ के साथ ही उच्च पुलिस अधिकारी और आईजीपी का तबादल कर दिया गया है। इसके पहले पुलिस की तीन सदस्यीय टीम और फॉरेन्सिक अधिकारी मामले की जांच कर रहे थे। हालांकि, सरकार ने जांच को सार्वजनिक नहीं किया है।

सबसे पहले 7 सितंबर को उत्तर प्रदेश से जुड़े टेक्सटाइल कर्मचारी रामनारायण यादव की मौत हुई। इसके बाद मजदूर नीतेश राठौड़ (21) की मां और बहन की मौत हो गई। नीतेश ने बताया कि उसकी मां रामीला (50) और बहन नीता (30) अपने पति से अलग रह रही थीं और उनकी कम्यूनिटी के दूसरे लोगों की तरह शराब की आदती थीं। उसके पिता की 5 साल पहले कमजोरी से मौत हो गई थी। वह इस समय मिट्टी के घर में अपनी दादी के साथ रह रहा है।

नीतेश ने बताया, 'उसकी मां और बहन दोनों मजदूरी करते थे। वे शराब पीकर घर लौटती थी। मैं उनसे संघर्ष करता था। उसने बताया कि वह उनके दाह संस्कार के लिए पैसे नहीं जुटा पाया था। पंचायत में अंतिम संस्कार के खर्च का वहन किया।
 
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