आईपीएस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कॉडर अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बता दें कि ऑर्गेनाइज्ड सर्विस कैडर से जुड़े मामले में 18 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी में कॉडर रिव्यू होने के बाद नए सृजित किए गए आईजी के पचास फीसदी पदों को डेपुटेशन के जरिए भरने पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने कहा था कि अगले आदेश तक आईटीबीपी में एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पर कोई भी नियुक्ति डेपुटेशन से नहीं की जाएगी। हालांकि इसके बावजूद गृह मंत्रालय ने उसी दिन यूपी कॉडर के आईपीएस अधिकारी राजीव सभरवाल को आईटीबीपी के आईजी पद पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) दिए जाने के आदेश जारी कर दिए थे। बता दें कि आईपीएस सभरवाल तब नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर तैनात थे।
इसके अगले ही दिन यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच गया। अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे कोर्ट की अवमानना बताया। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जब तक इस नियुक्ति को वापस नहीं ली जाती, तब तक आगे सुनवाई नहीं होगी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने तुरंत गलतफहमी का हवाला देकर आईजी की नियुक्ति के आदेश वापस लिए।
50 फीसदी पदों पर डेपुटेशन से नहीं होगी कोई नियुक्ति
बता दें कि पिछले माह 23 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आईटीबीपी के कॉडर रिव्यू को अंतिम रूप दिया गया था। इस बैठक के बाद उसी दिन शाम को बल में नए पदों के सृजन का आदेश किया गया।
कॉडर रिव्यू के तहत आईटीबीपी में एडीशनल डीजी के दो, आईजी के दस, डीआईजी के दस, कमांडेंट के 13, टू-आईसी के 16 और डिप्टी कमांडेंट के 9 पदों के सृजन को मंजूरी दे दी गई। इनके अलावा नॉन जीडी कॉडर में भी आईजी के दो पदों को स्वीकृति मिली।
कॉडर अफसरों के मुताबिक, ऑर्गेनाइज्ड सर्विस कैडर की मौजूदा नीति के सभी नियमों के तहत नए सर्विस रूल बनाकर बल का कॉडर रिव्यू होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन बल के ही कुछ अधिकारी दोबारा से हाईकोर्ट पहुंच गए।
सोमवार को हाईकोर्ट में जस्टिस एस. मुरलीधर और तलवंत सिंह की बेंच ने आईजी के पचास फीसदी नए सृजित पदों को डेपुटेशन से भरने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा, अगले आदेश तक आईटीबीपी में एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पर कोई भी नियुक्ति डेपुटेशन से नहीं की जानी चाहिए।