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गृह मंत्रालय ने प्रतिनियुक्ति पर आईजी को भेजा, हाईकोर्ट ने फटकारा तो वापस लिया आदेश

Thu, 21 Nov 2019 04:10 PM IST
योगेश साहू डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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आईपीएस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कॉडर अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बता दें कि ऑर्गेनाइज्ड सर्विस कैडर से जुड़े मामले में 18 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी में कॉडर रिव्यू होने के बाद नए सृजित किए गए आईजी के पचास फीसदी पदों को डेपुटेशन के जरिए भरने पर रोक लगा दी थी।

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कोर्ट ने कहा था कि अगले आदेश तक आईटीबीपी में एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पर कोई भी नियुक्ति डेपुटेशन से नहीं की जाएगी। हालांकि इसके बावजूद गृह मंत्रालय ने उसी दिन यूपी कॉडर के आईपीएस अधिकारी राजीव सभरवाल को आईटीबीपी के आईजी पद पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) दिए जाने के आदेश जारी कर दिए थे। बता दें कि आईपीएस सभरवाल तब नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर तैनात थे।

इसके अगले ही दिन यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच गया। अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे कोर्ट की अवमानना बताया। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जब तक इस नियुक्ति को वापस नहीं ली जाती, तब तक आगे सुनवाई नहीं होगी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने तुरंत गलतफहमी का हवाला देकर आईजी की नियुक्ति के आदेश वापस लिए।
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50 फीसदी पदों पर डेपुटेशन से नहीं होगी कोई नियुक्ति
बता दें कि पिछले माह 23 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आईटीबीपी के कॉडर रिव्यू को अंतिम रूप दिया गया था। इस बैठक के बाद उसी दिन शाम को बल में नए पदों के सृजन का आदेश किया गया।

कॉडर रिव्यू के तहत आईटीबीपी में एडीशनल डीजी के दो, आईजी के दस, डीआईजी के दस, कमांडेंट के 13, टू-आईसी के 16 और डिप्टी कमांडेंट के 9 पदों के सृजन को मंजूरी दे दी गई। इनके अलावा नॉन जीडी कॉडर में भी आईजी के दो पदों को स्वीकृति मिली।

कॉडर अफसरों के मुताबिक, ऑर्गेनाइज्ड सर्विस कैडर की मौजूदा नीति के सभी नियमों के तहत नए सर्विस रूल बनाकर बल का कॉडर रिव्यू होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन बल के ही कुछ अधिकारी दोबारा से हाईकोर्ट पहुंच गए।

सोमवार को हाईकोर्ट में जस्टिस एस. मुरलीधर और तलवंत सिंह की बेंच ने आईजी के पचास फीसदी नए सृजित पदों को डेपुटेशन से भरने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा, अगले आदेश तक आईटीबीपी में एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पर कोई भी नियुक्ति डेपुटेशन से नहीं की जानी चाहिए।

कॉडर अफसरों का आरोप, अदालत को गुमराह करने का प्रयास

केंद्रीय सुरक्षा बलों के कॉडर अफसरों का आरोप है कि आईपीएस लॉबी के दबाव में आकर गृह मंत्रालय ने डेपुटेशन से आईपीएस राजीव सभरवाल को आईटीबीपी में आईजी पद पर भेजा था। इसमें अदालत के स्थगन आदेश को दरकिनार किया गया।

उनका कहना है कि डेपुटेशन पर आईजी की प्रतिनियुक्ति बताती है कि गृह मंत्रालय के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया। अदालत की ओर से रोक लगाए जाने के बावजूद प्रतिनियुक्ति के आदेश क्यों जारी किए गए।

मामला दोबारा से हाईकोर्ट की उसी बैंच के समक्ष पहुंचा तो संबंधित अधिकारियों को फटकार लगी। सरकार की ओर से कहा गया कि इस मामले में गलतफहमी हुई है। तब गृह मंत्रालय में डायरेक्टर अनंत किशोर सरन (पुलिस) ने 20 नवंबर को एक अन्य आदेश जारी किया।

इसमें आईजी राजीव सभरवाल की आईटीबीपी में बतौर आईजी प्रतिनियुक्ति रद्द की गई। मंत्रालय की ओर से इसके पीछे प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया।

कई वर्षों से चल रहा है विवाद

पिछले पांच-छह वर्षों से केंद्रीय सुरक्षा बलों के कॉडर अफसरों और आईपीएस अधिकारियों के बीच अपने हितों को लेकर विवाद चल रहा है। यह विवाद पहले हाईकोर्ट पहुंचा था और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट। दोनों ही जगह कॉडर अफसरों के हित में फैसला आया।

सुप्रीम कोर्ट ने भी फरवरी में कॉडर अफसरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ग्रुप-ए की संगठित सेवाओं का दर्जा देकर वहां तत्काल प्रभाव से एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंसियल अपग्रेडेशन) लागू किया जाए। सभी बलों के कॉडर अधिकारियों को संगठित सेवा कॉडर का हिस्सा बनाकर नए नियमों के तहत सर्विस के सभी फायदे दिए जाएं।

यानि एक तय समय सीमा के बाद इन अधिकारियों को अगला रैंक (किसी वजह से जैसे सीट खाली नहीं है या कोई दूसरी दिक्कत है) नहीं मिलता है तो उस रैंक के सभी वित्तीय लाभ संबंधित अधिकारी को दिए जाएं। इसके खिलाफ आईपीएस एसोसिएशन भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

बल के अधिकारियों का आरोप है केंद्र सरकार ने कथित तौर पर आईपीएस एसोसिएशन का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को हल करने के लिए एक कमेटी गठित करने की बात कही और इसके लिए 30 नवंबर तक का समय ले लिया था।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद माना

सुप्रीम कोर्ट के 5 फरवरी 2019 के फैसले के अनुसार सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ऑर्गेनाइज्ड कॉडर का हिस्सा माना गया था। इसके बाद 23 अक्तूबर 2019 को केंद्रीय कैबिनेट ने आईटीबीपी का कॉडर रिव्यू मंजूर किया। इसमें कहा गया कि आईटीबीपी को ऑर्गेनाइज्ड कॉडर मानकर इसके सभी अफसरों को सेवा लाभ दिए जा रहे हैं।

आईटीबीपी के स्थापना दिवस पर हुई प्रेसवार्ता में खुद डीजी एसएस देशवाल ने यह बात कही थी कि कॉडर अफसरों को सभी फायदे दे दिए गए हैं। बता दें कि उन्होंने अपने दोनों तरफ बैठे कॉडर अफसरों की ओर देखकर कहा था कि क्या आपको इनके चेहरे देखकर लगता है कि इन्हें कोई दिक्कत है। ये सभी बहुत खुश हैं।

इसके कुछ ही घंटे बाद बल का कॉडर रिव्यू जारी कर दिया गया। बल के अधिकारियों का कहना था कि यह रिव्यू पुराने नियमों के तहत हुआ है। नए सर्विस रूल नहीं बनाए गए हैं। पुराने सर्विस रूल्स के अनुसार, डेपुटेशन की व्यवस्था जारी रखी जा रही है।

दूसरी ओर आर्गेनाइज्ड सर्विस कॉडर में यह बात कही गई है कि किसी भी बल में आईजी रैंक तक के सभी पदों को सिर्फ कॉडर सेवा के अधिकारियों को प्रमोशन देकर ही भरा जाना आवश्यक है। आईटीबीपी के कॉडर अधिकारी इसके विरोध में दिल्ली हाईकोर्ट चले गए थे। तब हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए आईटीबीपी में आईजी रैंक पर किसी भी तरह के डेपुटेशन से होने वाली नियुक्ति पर रोक लगा दी।
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