भारत म्यांमार के साथ उस मौजूदा द्विपक्षीय समझौते से पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करेगा, जिसके तहत दोनों देशों की सीमा के 16 किलोमीटर भीतर तक भारतीय और म्यांमार नागरिकों को बेरोकटोक आवाजाही की अनुमति है।
आतंकवादियों द्वारा हथियारों, नशीली दवाओं और नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी के लिए इस समझौते का फायदा उठाया जा रहा है। म्यांमार के रखाइन प्रांत में हिंसा के बाद रोहिंग्या मुसलमानों के बड़े पैमाने पर पलायन के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा यह कदम उठाया जा रहा है।
विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) रीना मित्रा और संयुक्त सचिव (पूर्वोत्तर) सतेंद्र गर्ग ने मिजोरम, नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश समेत सभी चार राज्यों का दौरा किया है, जिनकी सीमाएं म्यांमार से सटी हैं, जहां मुक्त आवाजाही समझौते (एफएमआर) लागू है।
गृहमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मित्रा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय एफएमआर समिति ने दौरे के दौरान सीमा से सटे कई पहलुओं का अध्ययन किया। इस दौरान संबंधित राज्य के मुख्य सचिवों, डीजीपी, आयुक्त और असम राइफल्स के साथ बैठकें भी हुईं।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने म्यांमार के साथ मुक्त आवाजाही समझौते के क्रियान्वयन के लिए सीमा राज्यों द्वारा तय मौजूदा नियम और कानून की समीक्षा के लिए जून में ही दो सदस्यीय एफएमआर समिति गठित की थी। गौरतलब है कि म्यांमार के साथ भारत की 1643 किलोमीटर सीमा है।