देश में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की संख्या 10 लाख से अधिक है। सीआरपीएफ में ही 3.25 लाख से ज्यादा अफसर और जवान हैं। सरकार चाहती है कि इस बल में, खासतौर पर कॉम्बेट ऑपरेशन में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को तरजीह दी जाए।
सूत्रों के अनुसार, पिछले साल सीआरपीएफ में करीब 24 हजार जवान ऐसे थे, जो स्वास्थ्य वजहों से तय मापदंडों पर खरे नहीं उतर सके। इनमें बहुत से जवानों की आयु 45 से अधिक थी। सीआरपीएफ के एक आईजी ने गत वर्ष ही नक्सल क्षेत्र में तैनात करीब आठ सौ जवानों को दूसरी बटालियनों या यूनिट मुख्यालयों पर तैनात करने की सिफारिश की थी।
केंद्रीय गृहमंत्री की बैठक के बाद जो प्रस्ताव तैयार हुआ, उसके तहत सीआरपीएफ और कॉम्बेट ऑपरेशन में भाग लेने वाले बलों के 40 साल से ज्यादा आयु वाले जवानों को नॉन कॉम्बेट विंग में भेजा जाएगा। साथ ही ऐसे जवानों का सीआईएसएफ और एसएसबी में भी विलय होगा।
पिछले दिनों सीआईएसएफ में भी यह योजना बनाई गई थी कि यहां केवल बीस फीसदी पदों पर ही सीधी भर्ती हो। बाकी के अस्सी फीसदी पदों पर दूसरे केंद्रीय बलों से प्रतिनियुक्ति के जरिए कर्मियों को बुलाया जाए।