केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर हैं जिनका उपयोग प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षित आतंकवादियों की जम्मू कश्मीर में घुसपैठ कराने के लिए किया जाता है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार पीओके में अनेक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर हैं, जिनका प्रयोग प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षित आतंकवादियों की जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों हेतु घुसपैठ कराने के लिए किया जाता है। इनमें से कुछ प्रशिक्षण शिविर अब भी सक्रिय हैं और वे आतंकवादियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सीमा-पार से आतंकियों की घुसपैठ खत्म करने और उन्हें सहायता पहुंचाने वाले बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाया है। सरकार ने सीमा-पार आतंकवाद और घुसपैठ में पाक की सतत सहायता के मुद्दे को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर भी उठाया है।
हिंसा के दौरान इंटरनेट शटडाउन पर नहीं रहता केंद्र का नियंत्रण
इससे पहले राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने बताया कि इंटरनेट पर रोक या इंटरनेट शटडाउन की स्थिति में इंटरनेट का नियंत्रण केंद्र के हाथ में नहीं होता है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि साइबर स्पेस में काफी चुनौतियां हैं। यहां कोई भी सूचना काफी तेजी से वायरल होती है जिसके दुरुपयोग की संभावना लगातार बनी रहती है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार की ओर राज्यसभा में बताया गया कि किसी भी हिंसा या दंगे के दौरान जब इंटरनेट शटडाउन होता है तो उसका कंट्रोल राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के हाथ में होता है। देश में इंटरनेट का शटडाउन टेलीकॉम सर्विसेज (संशोधन) का अस्थायी निलंबन नियमावली 2020 के तहत होता है।