गृह मंत्रालय ने इशरत जहां मामले की फाइल नोटिंग से जुड़े सेवा विस्तार पाए आईएएस अधिकारी बी के प्रसाद का ब्योरा देने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि कथित फर्जी मुठभेड़ में मारी गई इशरत जहां से संबद्ध गायब फाइल की जांच वाली समिति से प्रसाद जुड़े हैं।
बी के प्रसाद 31 मई 2016 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन उन्हें दो महीने का सेवा विस्तार दिया गया है। आरटीआई के जरिये इस संबंध में मंत्रालय से फाइल नोटिंग की कॉपी मांगी गई थी।
बताया गया कि चूंकि फाइल नोटिंग का मामला कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट कमेटी से जुड़ा है इसलिए पारदर्शिता कानून के तहत इसकी सूचना नहीं दी जा सकती। प्रसाद 1983 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और उनका कार्यकाल मई में समाप्त होने वाला था।
उन्हें दो माह का सेवा विस्तार दिया गया है जो अब 31 जुलाई को समाप्त हो रहा है। सरकारी आदेश में इसका कोई कारण नहीं बताया गया है। गौरतलब है कि बी के प्रसाद हाल ही में उस वक्त सुर्खियों में आ गए थे जब गुम फाइल के मामले में उन पर आरोप लगा कि वह गवाह को सिखा पढ़ा रहे हैं।
हालांकि उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया था। इस मामले में गृह मंत्रालय ने आरटीआई कार्यकर्ता से कहा कि साबित करे कि वह भारतीय नागरिक है।