जम्मू-कश्मीर के पंपोर में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले की समीक्षा में सुरक्षा संबंधी कई खामियां उजागर हो रही हैं। इन खामियों को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा के साथ बैठक की है। अभी सरकार की सबसे बड़ी चिंता अगले माह शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा है, जो पहले से ही आतंकियों के निशाने पर है। हालांकि मंत्रालय इसे रुटीन बैठक बता रहा है।
गृहमंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक पिछले साल तक घाटी से संचालित आतंकी संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच श्रद्धालुओं पर हमले नहीं करने का अघोषित करार था। हालांकि इसके बावजूद यात्री की सुरक्षा के पूरे इंतजाम रखे जाते थे।
इस बार हालात बदले हुए हैं। लगातार मिल रही खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक घाटी में आतंकी गतिविधियों में गुणात्मक बदलाव दिख रहा है। सूत्रों ने इसके बारे में ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों इकट्ठा किए गए इंटरसेप्ट से हमले के पूरे संकेत मिल रहे थे। इस आधार पर सुरक्षा बलों ने कई सफल ऑपरेशन भी किए। लेकिन पंपोर हमले को नहीं रोक पाए। गृहमंत्री-एनएसए के बीच हुई बैठक में यह मसला उठा कि पंपोर का आतंकी हमले से पहले छह से सात घंटे तक ऑल्टो कार से घाटी में घूमता रहा।
सीआरपीएफ काफिला आने से पहले उसे हाईवे के ऐसे तय जगह पर छोड़ा गया जहां मोड़ होने की वजह से गाड़ी की गति धीमी हो जाती है। इस हमले की किसी ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी की, लेकिन किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। उच्च अधिकारी इस घटना को सुरक्षा के लिहाज से काफी खतरनाक बता रहे हैं। गृहमंत्री ने यात्रा के लिए अर्धसैनिक बल की 30 नई कंपनियों की मंजूरी भी दे दी है।