नमो के तीन साल के जश्न में नजरें बेशक पीएम मोदी पर हैं। मगर सरकार की सफलता में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका भी कम नहीं हैं। सरकार के सामने आईं चुनौतियां राजनैतिक रही हों या प्रशासनिक संकटमोचक की भूमिका में आगे आकर राजनाथ ने ही बाधाओं को दूर किया है। मोदी सरकार के अन्य मंत्रियों के इत्तर प्रचार—प्रसार से दूरी बरतते हुए लो प्रोफाईल रहकर प्रशासनिक रूप से मोदी के लिए चुनौती बनी जम्मू—कश्मीर एवं नक्सलवाद की समस्या से राजनाथ लोहा ले रहे हैं।
तो भूमि अधिग्रहण बिल, जाट आंदोलन और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर ललित मोदी के आरोपों से सरकार के सामने उभरे राजनीतिक संकट को दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गृह मंत्री के कामकाज की सराहना करते हुए कहा है कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए सरकार कठोरता से कार्य कर रही है। जम्मू—कश्मीर के मामले पर भी उन्होंने कहा कि नतीजे जल्द सामने आएंगे। राज्य के हालातों पर सरकार की पूरी नजर है।
राजनाथ ने किन मौंकों मोदी को राजनीतिक संकटों से उबारा
वैसे राजनाथ सिंह भाजपा अध्यक्ष रहते वक्त से ही पीएम मोदी के साथ चट्टान की तरह डटे हुए हैं। पीएम मोदी को गोवा में चुनाव प्रबंधन की कमान सौंपने का मामला हो या उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने का दौर, आडवाणी—जोशी सरीखे वरिष्ठ नेताओं के विरोध कर राजनाथ ने मोदी का साथ दिया। पीएम बनने के बाद भूमि अधिग्रहण बिल के रूप में मोदी के सामने पहला राजनीति संकट आया। उस वक्त संकट दूर करने की जिम्मेदारी मोदी ने राजनाथ को ही सौंपी।
गृह मंत्री राजनाथ ने तमाम किसान संगठन और उनके नेताओं से मिलकर मोदी के पहले राजनीतिक संकट को दूर किया। दूसरा संकट हरियाणा के जाट आंदोलन के रूप में सरकार के सामने आया। इसके निदान के लिए भी पीएम मोदी ने राजनाथ को जिम्मा सौंपा। अपने राजनीतिक अनुभवों के जरिए राजनाथ इस संकट को भी दूर करने में सफल रहे थे। तो मोदी सरकार की शीर्ष मंत्री सुषमा स्वराज पर ललित मोदी से संबंधों और उन्हें सहयोग किए जाने का आरोप लगा तो इस संकट को हरने की भूमिका भी राजनाथ ने ही निभाई।
मामला सामने आते ही राजनाथ तुंरत पीएम मोदी से मिलने पहुंचे थे। उसके बाद पूरी सरकार और भाजपा सुषमा के साथ खडी हुई। इसके अलावा राजनाथ ने सरकार को अपने अनुभवों से प्रशासनिक संकटों से भी उबारा है।