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मोदी के 3 साल: सरकार के संकटमोचक रहे राजनाथ 

Sat, 27 May 2017 12:21 PM IST
amarujala.com- written by: संजय मिश्र
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राजनाथ सिंह
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नमो के तीन साल के जश्न में नजरें बेशक पीएम मोदी पर हैं। मगर सरकार की सफलता में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका भी कम नहीं हैं। सरकार के सामने आईं चुनौतियां राजनैतिक रही हों या प्रशासनिक संकटमोचक की भूमिका में आगे आकर राजनाथ ने ही बाधाओं को दूर किया है। मोदी सरकार के अन्य मंत्रियों के इत्तर प्रचार—प्रसार से दूरी बरतते हुए लो प्रोफाईल रहकर प्रशासनिक रूप से मोदी के लिए चुनौती बनी जम्मू—कश्मीर एवं नक्सलवाद की समस्या से राजनाथ लोहा ले रहे हैं।
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तो भूमि अधिग्रहण बिल, जाट आंदोलन और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर ललित मोदी के आरोपों से सरकार के सामने उभरे राजनीतिक संकट को दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गृह मंत्री के कामकाज की सराहना करते हुए कहा है कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए सरकार कठोरता से कार्य कर रही है। जम्मू—कश्मीर के मामले पर भी उन्होंने कहा कि नतीजे जल्द सामने आएंगे। राज्य के हालातों पर सरकार की पूरी नजर है। 

राजनाथ ने किन मौंकों मोदी को राजनीतिक संकटों से उबारा 

वैसे राजनाथ सिंह भाजपा अध्यक्ष रहते वक्त से ही पीएम मोदी के साथ चट्टान की तरह डटे हुए हैं। पीएम मोदी को गोवा में चुनाव प्रबंधन की कमान सौंपने का मामला हो या उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने का दौर, आडवाणी—जोशी सरीखे वरिष्ठ नेताओं के विरोध कर राजनाथ ने मोदी का साथ दिया। पीएम बनने के बाद भूमि अधिग्रहण बिल के रूप में मोदी के सामने पहला राजनीति संकट आया। उस वक्त संकट दूर करने की जिम्मेदारी मोदी ने राजनाथ को ही सौंपी।
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गृह मंत्री राजनाथ ने तमाम किसान संगठन और उनके नेताओं से मिलकर मोदी के पहले राजनीतिक संकट को दूर किया। दूसरा संकट हरियाणा के जाट आंदोलन के रूप में सरकार के सामने आया। इसके निदान के लिए भी पीएम मोदी ने राजनाथ को जिम्मा सौंपा। अपने राजनीतिक अनुभवों के जरिए राजनाथ इस संकट को भी दूर करने में सफल रहे थे। तो मोदी सरकार की शीर्ष मंत्री सुषमा स्वराज पर ललित मोदी से संबंधों और उन्हें सहयोग किए जाने का आरोप लगा तो इस संकट को हरने की भूमिका भी राजनाथ ने ही निभाई।

मामला सामने आते ही राजनाथ तुंरत पीएम मोदी से मिलने पहुंचे थे। उसके बाद पूरी सरकार और भाजपा सुषमा के साथ खडी हुई। इसके अलावा राजनाथ ने सरकार को अपने अनुभवों से प्रशासनिक संकटों से भी उबारा है। 
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राजनाथ ने कसी आतंकवाद और नक्सलवाद पर लगाम

- फोटो : amar ujala
आंकडे बता रहे हैं कि गृहमंत्री के रूप में राजनाथ ने न सिर्फ आतंकवाद बल्कि नक्सलवाद की भी लगाम कसी है। पिछले 3 वर्षों में 368 आतंकी मौत के घाट उतारे जा चूके हैं। जिनमें से उनके शीर्ष कमांडर भी रहे। तो जम्मू—कश्मीर के नागरिकों की सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय ने आईआर की 5 नई बटालियनें भेजी हैं। गृह मंत्रालय के जरिए चलने वाली उडान योजना ने अलगावादियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। उडान योजना के तहत जम्मू—कश्मीर के युवकों की सैन्य बलों में विशेष भर्ती की जा रही है।

प्राप्त आंकडो के अनुसार उडान के जरिए सैन्य एवं पुलिस बल से जुडे 27873 युवकों ने प्रशिक्षण स्वीकार किया है। 13175 को नौकरी का आॅफर मिल चूका है और 8807 युवक काम में लग गए हैं। यही नहीं राजनाथ ने जम्मू—कश्मीर में आतंकियों के मंसूबो को तोडने के लिए एसपीओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। पहले से 25474 एसपीओ की संख्या में इजाफा करते हुए गृह मंत्री ने 10हजार नए एसपीओ नियुक्त करने का निर्णय लिया है। एसपीओ को मिलने वाली 3000 की राशि को राजनाथ ने 6000 कर दिया है। ये एसपीओ पुलिस की मदद करते हैं अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ।

आईएसआईएस के खिलाफ सजग है राजनाथ का गृह मंत्रालय
विश्व के लिए खतरा बने आतंकी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ राजनाथ का गृह मंत्रालय शुरू से ही सजग है। मंत्रालय की सजगता का प्रमाण है कि आईएसआईएस से सहानुभूति रखने वाले 81 लोगों को देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक दबोचा गया है। इस मामले में राज्यों के साथ केंद्र का गृहमंत्रालय विशेष संपर्क स्थापित किए हुए है। 

नक्सलवाद पर नकेल 
राजनाथ के गृह मंत्री बनने के बाद से नक्सली घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2013 में जहां नक्सली घटनाओं की संख्या 1136 थी। 2017 में घटकर वो 1048 रह गई हैं। हालांकि सूकमा सरीखे घटनाओं का घाव सरकार पर जरूर लगा है। मगर आंकडे बता रहे हैें कि नक्सलियों की गिरफतारी और सरेंडर करने की संख्या बढी है। नक्सलियों के गिरफ्तार करने की संख्या 1397 से बढकर 1840 पहुंच गई है। इस मामले में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज है। तो नक्सलियों के सरेंडर करने के मामले में 411 प्रतिशत की वृद्धि है। नकसलियों के सरेंडर करने की संख्या 282 से बढकर 1442 हो पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि यह सरकार के कडी कार्रवाई का नतीजा है। 

नक्सल क्षेत्र का आर्थिक विकास
नकसलियों पर लगाम कसने की कोशिशों के साथ गृहमंत्रालय ने आदिवासी एवं पिछडे इलाकों के विकास पर भी पूरा जोर दिया है। राहत प्रदान करने के लिए अति नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 35 से बढाकर 47 की गई हैं। यहां के लिए अलग से विकास योजनाएं चलाई जा रही हैं और यहां आर्थिक गतिविधियों को बढावा दिया जा रहा है। आंकडो के अनुसार नक्सल प्रभावित जिलों में विभिन्न बैंको के 358 नए ब्रांच खोले गए हैं। 752 एटीएम खोली गई हैं और 1784 डाक घर खोलने की अनुमति प्रदान की गई है।
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