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पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक: गृह मंत्री अमित शाह पणजी में करेंगे अध्यक्षता, विवाद निपटाने पर जोर

Sat, 05 Sep 2026 06:39 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा-नगर हवेली एवं दमन-दीव से जुड़े अंतर-राज्यीय मुद्दों, विकास और सहयोग पर चर्चा होगी। परिषद सहकारी संघवाद के तहत राज्यों के बीच विवादों के समाधान और आपसी सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है।
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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को गोवा की राजधानी पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव संघ राज्यक्षेत्र शामिल हैं। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद सहित पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री, गोवा इसके उपाध्यक्ष हैं। सदस्य राज्यों में से एक राज्य के मुख्यमंत्री (हर साल बारी-बारी से) परिषद के उपाध्यक्ष होते हैं। 
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यह बैठक अंतर-राज्य परिषद सचिवालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गोवा सरकार की मेज़बानी में आयोजित की जा रही है। इस क्षेत्रीय परिषद में पश्चिमी क्षेत्र के प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री तथा दो वरिष्ठ मंत्री सदस्य हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारों/ संघ राज्यक्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी परिषद की इस बैठक में भाग लेंगे। क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का गठन किया है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को पहले क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष रखा जाता है। यहां पर विचार के बाद शेष बचे मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाता है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारी संघवाद के आधार पर देश के सामने टीम भारत की कल्पना रखी है। क्षेत्रीय परिषदें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। पीएम मोदी ने सर्वांगीण विकास हासिल करने के लिए सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। क्षेत्रीय परिषदें, इस भावना के साथ कि मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं, दो या अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों को एक-साथ प्रभावित करने वाले मुद्दों पर, संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र, तथा इसके जरिये आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मंच प्रदान करती हैं।
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क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका सलाहकारी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये परिषदें विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग के स्वस्थ बंधन को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुई हैं। सभी राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से पिछले 12 वर्षों में (जून 2014 से अब तक) विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और इनकी स्थायी समितियों की कुल 70 बैठकें हुईं है। क्षेत्रीय परिषदें, केंद्र और सदस्य राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के बीच, सदस्य राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के मध्य, तथा क्षेत्र के मुद्दों और विवादों को हल करने और उन पर प्रगति लाने के लिए एक श्रेष्ठ मंच प्रदान करती है। 

ये परिषदें, राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा करती हैं जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और इनके शीघ्र निपटान के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का कार्यान्वयन, आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली का कार्यान्वयन (ईआरएसएस-112), खाद्य सुरक्षा मानकों से संबंधित मुद्दा, प्रत्येक गांव के नियत दायरे में ब्रिक-एंड-मोर्टार बैंकिंग सुविधा का प्रदाय, तथा पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युत रिफॉर्म्स, शहरी प्लानिंग, सहकारिता व्यवस्था का सुदृढीकरण, साइबर अपराध और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित मुद्दे, आदि शामिल हैं। 
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