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असम-अरुणाचल सीमा विवाद: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोले, अगले साल तक इस मुद्दे का समाधान होने की उम्मीद

Sat, 21 May 2022 04:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देओमाली

सार

अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने असम के साथ चल रहे सीमा विवाद को लेकर कहा कि इसका समाधान अगले साल तक हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से उत्तर-पूर्व के विकास के लिए किए जा रहे काम और प्रयास भी गिनाए।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : twitter/BJP4India
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि असम और अरुणाचल के बीच अंतरराज्यीय सीमा विवाद के अगले साल तक हल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि असम और अरुणाचल प्रदेश की सरकारें इस विवाद के एक स्थायी और उचित समाधान के लिए काम कर रही हैं। 

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शाह अरुणाचल के तिरप जिले में नरोत्तम नगर के रामकृष्ण मिशन स्कूल के गोल्डन जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे। यहां उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और विकास लाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। 

यह कहते हुए कि पूर्वोत्तर को उग्रवाद मुक्त बनाने के प्रयास लगातार चल रहे हैं, शाह ने दावा किया कि केंद्र में प्रधानमंतंरी नरेंद्र मोदी की सरकार के पिछले आठ वर्षों के कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र के लगभग 9000 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
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'उत्तर-पूर्व के युवा अब बंदूकें नहीं लैपटॉप लेकर चल रहे हैं'
गृह मंत्री ने कहा कि अब उत्तर-पूर्व के युवाओं को बंदूकें और पेट्रोल बम लेकर चलने की जरूरत नहीं है। अब वह अपने हाथों में लैपटॉप लेकर चल रहे हैं और स्टार्टअप्स की शुरुआत कर रहे हैं। यह विकास का वह रास्ता है जिसकी कल्पना केंद्र सरकार की ओर से इस क्षेत्र के लिए की गई है।

'भाजपा की सरकार में एक भी दिन बंद नहीं हुआ मणिपुर'
शाह ने कहा कि मणिपुर को पहले एक साल में 200 से अधिक दिनों के लिए बंद और अवरोधों के लिए जाना जाता था। अब वह राज्य बड़े परिवर्तनों का गवाह बन रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मणिपुर में पिछले पांच साल के भाजपा सरकार शासन के दौरान एक भी बंद आयोजित नहीं हुआ है।




'केंद्र सरकार ने बनाया उत्तर-पूर्व के लिए त्रि-स्तरीय एजेंडा'
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में आतंकी संगठनों का आत्मसमर्पण और ब्रू शरणार्थियों के मुद्दे का समाधान मोदी सरकार ने किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने असम के कारबी आंगलोंग में शांति स्थापित करने के लिए कदम उठाए हैं। उत्तर-पूर्व के विकास के लिए एक त्रि-स्तरीय एजेंडा बनाया गया है।

आश्रम में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का किया अनावरण
इससे पहले शाह ने रामकृष्ण मिशन आश्रम में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। शाह ने कहा कि राष्ट्रवाद और अनंत ज्ञान के अप्रतिम प्रतीक युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद के विचार हमारे लिए प्रेरणा के अखंड स्त्रोत हैं, जो युग-युगांतर तक देश का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

भगवान परशुराम की 51 फीट की कांस्य प्रतिमा का शिलान्यास
केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने अरुणाचल के लोहित जिले के परशुराम कुंड पर भगवान परशुराम की 51 फीट की कांस्य प्रतिमा का शिलान्यास किया। यह प्रतिमा विप्र फाउंडेशन की ओर से स्थापित की गई। साथ ही शाह ने यहां परशुराम कुंड स्थल पर मंदिर का जीर्णोद्धार कर स्थापित की गई 6 फुट की परशुराम की प्रतिकृति का भी अनावरण किया।

गृह मंत्रालय ने अंतर राज्य परिषद की स्थायी समिति का पुनर्गठन किया
गृह मंत्रालय ने अपने 13 सदस्यों सहित अंतर राज्य परिषद की स्थायी समिति का पुनर्गठन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी एक गजट अधिसूचना के मुताबिक मंत्रालय ने अंतर राज्यीय परिषद सचिवालय की 9 अगस्त, 2019 की अधिसूचना और प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद यह कदम उठाया है।

अंतर राज्य परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अलावा, चार अतिरिक्त सदस्य- वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार और जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत परिषद में केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों में शामिल हैं। इनके अलावा आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगनमोहन रेड्डी, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, पंजाब के सीएम भगवंत मान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नई समिति के सदस्य होंगे।

गजट अधिसूचना के अनुसार स्थायी समिति परिषद के विचारार्थ मामलों पर निरंतर परामर्श करेगी। यह केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े सभी मामलों को अंतर राज्य परिषद में विचार के लिए उठाए जाने से पहले संसाधित करती है। समिति परिषद की सिफारिशों पर लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की निगरानी भी करती है और अध्यक्ष या परिषद द्वारा संदर्भित किसी भी अन्य मामले पर विचार करती है।

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