केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह नाम से भी और मिजाज में भी शाह हैं। खान-पान के शौकीन हैं। शाकाहार भोजन के शौकीन शाह को पकौड़ा पसंद है। संसद भवन में अपने कमरे में अच्छा खासा समय देते हैं, कड़ा होमवर्क करते हैं। हर विकल्प पर सोचते हैं और नए तरीके से सफलता पाने की रणनीति बनाने में उनका कोई सानी नहीं है। शाह तरोताजा रहने के लिए और डाक्टरों की सलाह मानकर हर दो घंटे बाद मनपसंद नाश्ता लेते हैं। उनका अंदाज ही ऐसा है कि जो भी उनके पास जाता है, उसे बैठाते हैं और ईशारे से उसकी तरफ भी खाने-पीने की प्लेट रखने का आदेश देते हैं।
कुछ लोगों को लग रहा होगा कि अमित शाह ज्यादा बोलते होंगे। लेकिन उन्हें करीब से जानने वाले बताते हैं कि वह (अमित शाह) अपना हर समय सलीके के साथ खर्च करते हैं। तोल कर हर शब्द बोलते हैं। आज जो बोलते हैं उसे अच्छी तरह से लंबे समय तक याद रखते हैं। वह अपने से सामने वाले को सुनते हैं, मन से सुनते हैं और व्यवहारिक समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। उनके नजदीकी लोगों ने बताया कि पहले तो कुछ भी दिल पर लेते नहीं। किसी को यदि पिछली बार कुछ सलाह दी है और उसमें सुधार देखा तो उसका हौसला बढ़ाते हैं, लेकिन बार-बार नहीं टोकते। पूरा फोकस तैयारी, लक्ष्य और सफलता पर रहता है। लेकिन जब कुछ मन से सोच लेते हैं तो उसे अंजाम तक पहुंचाने की ठान लेते हैं।
शाह को शाकाहारी खाना, नाश्ता पसंद है। बड़े मन से उसका रसास्वादन करते हैं। उन्हें कुछ बार नाश्ता परोस चुके एक वेटर की मानें तो उन्हें खाने में पकौड़ा पसंद है। संसद की कैंटीन का खाना बड़े चाव से खाते हैं। खाने को लेकर कोई विशेष फरमाइश नहीं रहती। कभी किसी को इसके तंग नहीं करते। उनके कमरे में सेवाएं देने वाले काफी खुश रहते हैं, क्योंकि शाह जितने सख्त माने जाते हैं या दिखाई देते हैं, असल में ऐसे हैं नहीं। एक सूत्र की मानें तो उसने तीन-चार दशक में संसद के तमाम सांसदों को देखा है। मंत्रियों को सेवाएं दी है, इनमें शाह का मिजाज सबसे शानदार है।