पुनर्गठन के बाद भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक ही हाईकोर्ट होगा। मौजूदा कानून और सुनवाई भी पहले की तरह ही चलेंगी। हालांकि आगामी 31 अक्टूबर के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केंद्र के 108 कानून सीधे तौर पर लागू हो जाएंगे।
वहीं, जम्मू कश्मीर के अपने 164 कानून निरस्त हो जाएंगे, जबकि 166 कानून राज्य के जारी रहेंगे। यह जानकारी राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से जम्मू संभाग के जिला सेशन जजों के लिए रविवार को कबूलनामे और सह अपराधी की स्टेटमेंट में ‘एप्रिसिएशन ऑफ एविडेंस’ विषय पर आयोजित रिफ्रेशर कार्यक्रम में दी गई।
इस अवसर पर पूर्व जज जनकराज कोतवाल ने कहा कि ‘एप्रिसिएशन ऑफ एविडेंस’ के मामले में एविडेंस एक्ट की जरूरत है। अकादमी के निदेशक राजीव गुप्ता ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 और कोर्ट में लंबित मामलों पर अपने विचार रखे। ब्यूरो