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एचआईवी रोकथाम: वार्षिक इंजेक्शन के नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले, क्लीनिकल ट्रायल के दौरान मिले आशाजनक परिणाम

Wed, 12 Mar 2025 04:04 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जानलेवा संक्रामक रोग- एचआईवी को नष्ट करने या इससे संक्रमित रोगी के इलाज से जुड़ी अच्छी खबर सामने आई है। एक क्लिनिकल ट्रायल के दौरान  एचआईवी से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले सालाना इंजेक्शन को सुरक्षित माना गया है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik.com
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विस्तार
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एचआईवी के इलाज को लेकर आशा की किरण दिखी है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित  इस क्लिनिकल ट्रायल के परिणामों के मुताबिक एचआईवी से बचाव के लिए सालाना इंजेक्शन सुरक्षित है। इसका असर लंबे समय तक रहता है। एचआईवी की रोकथाम के विकल्प के रूप में इसे आशाजनक माना जा रहा है। 'लेनाकैपाविर' नाम के इस इंजेक्शन को अमेरिका में विकसित किया गया था। 

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शोध-आधारित बायोफार्मास्युटिकल कंपनी गिलियड साइंसेज ने एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए एक प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) दवा के रूप में 'लेनाकैपाविर' विकसित की थी। इसे मांसपेशियों के ऊतकों में इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों के मुताबिक यह दवा मानव कोशिकाओं में एचआईवी के प्रवेश और उसकी संख्या को नहीं बढ़ने देती। पहले चरण के ट्रायल के दौरान इंसानों के शरीर में लेनाकैपाविर कम से कम 56 सप्ताह तक रही। परीक्षण यादृच्छिक और नियंत्रित था। 
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क्लीनिकल ट्रायल में शामिल थे 40 प्रतिभागी
क्लीनिकल ट्रायल में 18-55 वर्ष की आयु के 40 प्रतिभागी शामिल थे, जिन्हें एचआईवी नहीं था। दवा के दो फॉर्मूलेशन तैयार किए गए थे। एक में 5 प्रतिशत इथेनॉल था, जबकि और दूसरे में 10 प्रतिशत। आधे प्रतिभागियों को लेनाकैपाविर के पहले प्रकार का इंजेक्शन लगाया गया, जबकि दूसरे समूह को 10 फीसदी इथेनॉल वाला टीका लगाया गया। एक खुराक दवा की मात्रा 5000 मिलीग्राम थी। प्रतिभागियों से 56 सप्ताह तक नमूने एकत्र करने के बाद सैंपल का विश्लेषण किया गया। 
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इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर दर्द सबसे आम शिकायत थी। आम तौर पर दर्द बेहद हल्का था, जो एक सप्ताह के भीतर ठीक हो गया।  

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एचआईवी संक्रमित शख्स की इम्यूनिटी कमजोर होती है
बता दें कि ह्यूमन इम्यूनोडिफ़िशिएंसी वायरस यानी एचआईवी श्वेत रक्त कोशिकाओं को लक्षित करके किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। एचआईवी संक्रमित शख्स की इम्यूनिटी कमजोर होती है। फिलहाल एचआईवी या एचआईवी के सबसे एडवांस चरण- एड्स के लिए कोई इलाज या टीके को स्वीकृति नहीं मिली है। एड्स को एक्वायर्ड इम्यूनोडिफ़िशिएंसी सिंड्रोम (Acquired immunodeficiency syndrome) कहा जाता है। यानी वर्तमान में यह बीमारी लाईलाज है।

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