फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिर हैवान बने डॉक्टर, अस्पताल से HIV पीड़िता को भगाया, शिशु की मौत

Fri, 02 Sep 2016 12:48 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
एचआईवी पीड़ितों की मदद के लिए सरकारें बेशक तमाम योजनाएं चलाएं लेकिन उनके अपने ही लोग इन पर अमल नहीं होने देते। खासकर अस्पतालों में तो एचआईवी पीड़ितों को लेकर जबरदस्त संवेदनहीनता और भेदभाव का आलम है। 
विज्ञापन


इसकी एक बानगी देखने को मिली बदायूं के सरकारी अस्पताल में जहां एक गर्भवती महिला का प्रसव कराने से इसलिए इंकार कर दिया गया क्योंकि वह एचआईवी पीड़ित थी। इसके बाद मजबूरी में उसका पति उसे 50 किलोमीटर दूर लेकर बरेली पहुंचा जहां उसे भर्ती कराया गया। 

जहां इलाज में देरी के चलते महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया। घटना का दुखद पहलू ये है कि पति पत्नी दोनों शारीरिक रूप से विकलांग हैं। अब गलती पर गर्दन फंसती देख अस्पताल प्रशासन ने जांच का खेल शुरू कर दिया है। 
विज्ञापन


टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मामला बदायूं जिले का है। जहां श्याम और रीना (दोनों का बदला हुआ नाम) ने डेढ़ साल पहले शादी की थी। श्याम दिल्‍ली में रहकर नौकरी करता था जबकि उसकी पत्नी रीना काम की तलाश में दिल्‍ली आई थी। यहीं दोनों ने शादी कर ली। 

डॉक्टरों ने ग्लब्स के लिए मांगे 2 हजार लेकिन नहीं किया इलाज

- फोटो : Getty
शादी के बाद रीना लगातार बीमार रहने लगी तो उसे डॉक्टर को दिखाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि रीना एचआईवी पीड़ित है। श्याम ने बताया कि हम दिल्‍ली जैसे महंगे शहर में रहकर इलाज का खर्च नहीं झेल सकते थे इसलिए वापस बदायूं लौट आए। 

इसी बीच रीना गर्भवती हो गई, श्याम के अनुसार बीते रविवार को वह उसे लेकर बदायूं के जिला अस्पताल पहुंचा। उसे लगातार दर्द हो रहा था। आरोप है कि जब उसने डॉक्टरों से उसके इलाज के लिए कहा तो उसे एचआईवी पीड़ित बताते हुए डॉक्टरों ने इलाज से इंकार कर दिया। 

श्याम ने आरोप लगाया कि मैंने उनसे बहुत मिन्नतें की तो वह इलाज के लिए तैयार तो हुए लेकिन ग्लब्स लाने के लिए मुझसे दो हजार रुपये मांगे। उन्होंने मुझसे खून लाने के लिए भी कहा। इसके बावजूद भी हम दिनभर वहां पड़े रहे लेकिन मेरी पत्नी का इलाज नहीं किया गया। बल्कि हॉस्पिटल स्टाफ ने पत्नी को बरेली जिला अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया।
विज्ञापन

मामले में अब शुरू हुआ जांच का खेल

- फोटो : अमर उजाला
आंखों से टपकते आंसुओं को साफ करते हुए श्याम ने बताया कि जब तक हम बरेली पहुंचते देर हो गई थी और हमारा बच्चा मर चुका था। बच्चे को खोने के बाद श्याम चाहते हैं कि बदायूं के अस्पताल के आरोपी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जिससे किसी और को उनकी तरह परेशान न होना पड़े। 

वहीं बरेली की सीएमओ डा. अलका शर्मा ने बताया कि हमने उन लोगों (पति पत्नी) के यहां पहुंचते ही इलाज शुरू कर दिया। लेकिन काफी देर होने की वजह से बच्चे को नहीं बचाया जा सका। महिला को प्रसव में कुछ दिक्कत थी इसलिए उसे तुंरत आपरेशन की जरूरत थी। अगर वे कुछ पहले आ जाते तो बच्चे को बचाया जा सकता था। हालांकि फिलहाल महिला की हालत स्थिर है। 

जबकि बदायूं के सीएमओ डा. सुनील कुमार ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी है और इस संबंध में उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। वहीं अतिरिक्त निदेशक स्वास्‍थ्य डा. सुबोध शर्मा ने बताया कि वह मामले में जांच करवा रहे हैं। सीएमओ को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें