फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Durbar Hall-Ashok Hall: राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल के पहले भी बदले थे नाम, दिलचस्प है इनका इतिहास

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 26 Jul 2024 02:00 PM IST

सार

Durbar And Ashok Hall New Name: राष्ट्रपति भवन के 'दरबार हॉल' और 'अशोक हॉल' का नाम बदलकर 'गणतंत्र मंडप' और 'अशोक मंडप' कर दिया गया है। इनका इस्तेमाल विभिन्न औचारिक समारोहों के आयोजन के लिए किया जाता है। आइये जानते हैं दरबार हॉल और अशोक हॉल का इतिहास...
 
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल - फोटो : rashtrapati bhavan
राष्ट्रपति भवन के प्रतिष्ठित 'दरबार हॉल' और 'अशोक हॉल' का नाम बदल दिया गया है। गुरुवार को दरबार हॉल को नया नाम गणतंत्र मंडप जबकि अशोक हॉल को अशोक मंडप दे दिया गया। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक बयान में नए नामकरण की जानकारी दी गई। 

वर्तमान में दरबार हॉल का उपयोग नागरिक और रक्षा अलंकरण समारोहों की मेजबानी के लिए किया जाता है। वहीं अशोक हॉल का उपयोग खास औपचारिक कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। 


आइये जानते हैं कि राष्ट्रपति भवन में दरबार हॉल और अशोक हॉल क्या हैं? इनका इतिहास क्या है? अभी इनका नाम क्यों बदला गया?
विज्ञापन

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल - फोटो : rashtrapati bhavan
राष्ट्रपति भवन के प्रतिष्ठित 'दरबार हॉल' और 'अशोक हॉल' का नाम बदल दिया गया है। गुरुवार को दरबार हॉल को नया नाम गणतंत्र मंडप जबकि अशोक हॉल को अशोक मंडप दे दिया गया। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक बयान में नए नामकरण की जानकारी दी गई। 

वर्तमान में दरबार हॉल का उपयोग नागरिक और रक्षा अलंकरण समारोहों की मेजबानी के लिए किया जाता है। वहीं अशोक हॉल का उपयोग खास औपचारिक कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। 

आइये जानते हैं कि राष्ट्रपति भवन में दरबार हॉल और अशोक हॉल क्या हैं? इनका इतिहास क्या है? अभी इनका नाम क्यों बदला गया?

राष्ट्रपति भवन का दरबार हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
दरबार हॉल की कहानी
राष्ट्रपति भवन का भव्य दरबार हॉल अपने पीछे एक लंबी विरासत समेटे हुए है। हॉल उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी रहा जब आजाद भारत की पहली सरकार का यहां शपथ ग्रहण समारोह हुआ। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल की भव्यता मंत्रमुग्ध कर देने वाली है। यह राष्ट्रपति भवन का सबसे शाही कमरा है। यह भी दिलचस्प है कि राष्ट्रपति भवन के इस हॉल का पहली बार नाम नहीं बदला है। पहले इसे सिंहासन कक्ष के नाम से जाना जाता था। यह वही जगह है जहां सी. राजगोपालाचारी ने 1948 में भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में शपथ ली थी। हॉल का उपयोग 1977 में राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भी किया गया था।

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
क्या है दरबार हॉल की खासियत?
यह एक औपचारिक हॉल है जो राष्ट्रपति भवन के केंद्रीय गुंबद के ठीक नीचे स्थित है। यहां पहुंचने के लिए तीन विकल्प हैं। 42 फीट ऊंची दीवारें सफेद संगमरमर से बनी हैं। कहा जाता है कि गुंबद का व्यास 22 मीटर और जमीन से 25 मीटर ऊपर है। एक खास गुंबद दरबार हॉल में सूरज की रोशनी भर देता है। दरबार हॉल की सजावट एक उत्कृष्ट बेल्जियम ग्लास झूमर से की गई है। यह झूमर हॉल की छत से 33 मीटर की ऊंचाई से लटक रहा है। 

इस हॉल के चार शिखर हैं जिनमें दो पश्चिमी ओर और दो पूर्वी ओर हैं। दरबार हॉल पीले जैसलमेर संगमरमर से बने स्तंभों से घिरा हुआ है। अटारी में 12 संगमरमर की जालियां कमरे की सजावट के साथ-साथ वेंटिलेशन और रोशनी भी प्रदान करती हैं। तेज ज्यामितीय पैटर्न के साथ चमचमाता संगमरमर का फर्श इस हॉल की राजसी आभा को बढ़ाता है। कहा जाता है कि अकेले फर्श का पैटर्न इतना बड़ा है कि प्रवेश करने वाले की सांस फूल जाती है, वह अपने पहले दो या तीन कदम रखने से लगभग डर जाता है। 

दरबार हॉल के फर्श के लिए इस्तेमाल किया गया संगमरमर ज्यादातर भारत के अलग-अलग हिस्सों से आया था। सफेद संगमरमर मकराना और अलवर से, ग्रे संगमरमर मारवाड़ से, हरा बड़ौदा और अजमेर से और गुलाबी अलवर, मकराना और हरिपास से लाया गया था। हालांकि, दरबार हॉल के लिए इस्तेमाल किए गए गहरे चॉकलेटी रंग के संगमरमर को खास तौर पर इटली से लाया गया था।

राष्ट्रपति भवन का दरबार हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
दीवार के सामने लाल मखमली पृष्ठभूमि पर भगवान बुद्ध की पांचवीं शताब्दी की मूर्ति रखी गई है। इस मूर्ति के सामने राष्ट्रपति की कुर्सी रखी गई है। पहले इस स्थान पर दो सिंहासन रखे गए थे जिनमें से एक वायसराय के लिए और दूसरा वायसरीन के लिए था।

दरबार हॉल के गलियारे में देशभर के प्रसिद्ध मूर्तिकारों द्वारा गढ़ी गई पूर्व भारतीय राष्ट्रपतियों की प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं। हॉल की संगमरमर की दीवारों पर महात्मा गांधी, सी. राजगोपालाचारी, जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आदमकद पेंटिंग हैं। दरबार हॉल में राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के साथ गहरे लाल रंग के छह लंबे बैनर भी लगे हैं।

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
अभी दरबार हॉल का इस्तेमाल किसलिए किया जाता है?
मौजूदा समय में दरबार हॉल का उपयोग नागरिक और रक्षा अलंकरण समारोहों की मेजबानी के लिए किया जाता है। राष्ट्रपति प्राप्तकर्ताओं को प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करते हैं। आने वाली सरकारों के शपथ ग्रहण समारोह, मंत्रिपरिषद में शामिल होने वाले सदस्य और भारत के मुख्य न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह सभी दरबार हॉल में आयोजित किए जाते हैं। 

राष्ट्रपति भवन का अशोक हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
अब जानते हैं अशोक हॉल के बारे में 
राष्ट्रपति भवन के सबसे आकर्षक और अलंकृत कमरों में से एक अशोक हॉल है। पहले इसे स्टेट बॉलरूम के रूप में जाना जाता था। अशोक हॉल  की छत और फर्श दोनों का अपना अलग आकर्षण है। फर्श पूरी तरह से लकड़ी का बना है और इसकी सतह के नीचे स्प्रिंग लगे हैं, जबकि अशोक हॉल की छतें तेल चित्रों से सजी हैं।

छत के बीच में चमड़े की एक पेंटिंग है जिसमें फतह अली शाह का घुड़सवार चित्र है। फतह अली शाह फारस के सात कजर शासकों में से दूसरे थे। इस पेंटिंग में उन्हें अपने 22 बेटों की मौजूदगी में एक बाघ का शिकार करते दिखाया गया है। इस पेंटिंग की लंबाई 5.20 मीटर और चौड़ाई 3.56 मीटर है। फतह शाह ने खुद इंग्लैंड के जॉर्ज चतुर्थ को इसे उपहार में दी थी। वायसराय इरविन के कार्यकाल के दौरान, यह उपहार लंदन के इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी से लाया गया था और स्टेट बॉलरूम की छत पर चिपका दिया गया था। 

हॉल की दीवारों पर एक शाही जुलूस को दर्शाया गया है। पूरी दीवारों और छतों को रंगने का काम जून 1932 में शुरू हुआ और अक्तूबर 1933 में पूरा हुआ। छह बेल्जियम ग्लास झूमर की चमक के साथ, हॉल अपने आगंतुकों को मोहित करता है। ऑर्केस्ट्रा के लिए एक स्थान के रूप में स्टेट बॉलरूम में एक मचान भी बनाया गया था। हालांकि, अब इसका उपयोग राष्ट्रगान बजाने के लिए किया जाता है। दूसरी ओर, तीन बरामदे वेंटिलेशन मुहैया कराते हैं। अशोक हॉल की फ्रांसीसी खिड़कियां मुगल गार्डन की शानदार झलक देती हैं। दीवारें और खंभे हल्के भूरे रंग के संगमरमर से बने हैं। 

अशोक हॉल में उल्लेखनीय कलाकृतियां हैं। इसमें इंग्लैंड में बनी एक लंबी केस वाली घड़ी शामिल है। 32 मीटर x 20 मीटर माप वाले फारसी शैली के कालीन को विशेष रूप से अशोक हॉल की भव्यता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था। कहा जाता है कि कालीनों को बनाने में दो साल तक 500 बुनकर लगे थे। अशोक हॉल के कालीन गहरे लाल रंग के हैं, जिन पर पुष्प और वनस्पति आकृतियां बनी हुई हैं। आठ दशकों से अधिक समय तक उपयोग में रहने के बाद भी इन आकृतियों को अच्छी तरह से संजोया गया है। 

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
अशोक हॉल का इस्तेमाल किसलिए होता है?
इसका उपयोग खास औपचारिक कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। अशोक हॉल का उपयोग विदेशी मिशन प्रमुखों द्वारा परिचय पत्र प्रस्तुत करने के लिए होता है। इसके अलावा यह राष्ट्रपति द्वारा आयोजित राजकीय भोज से पहले आने वाले और भारतीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए परिचय का औपचारिक स्थान भी है।

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल - फोटो : राष्ट्रपति भवन
...तो दरबार हाल और अशोक हॉल के नाम क्यों बदला?
राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दरबार हॉल राष्ट्रीय पुरस्कारों की प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण समारोहों का स्थल है। दरबार शब्द का मतलब भारतीय शासकों और अंग्रेजों की अदालतों और सभाओं से है। भारत के गणतंत्र बनने के बाद इसकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है। गणतंत्र मंडप की अवधारणा प्राचीनकाल से भारतीय समाज में है, जिस वजह से आयोजन स्थल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप किया गया है।

सचिवालय के बयान में कहा गया कि अशोक हॉल का नाम बदलकर अशोक मंडप करने से भाषा में एकरूपता आती है। इसके अलावा अशोक शब्द अहम मूल्यों को बरकरार रखते हुए अंग्रेजीकरण की छाप को भी दूर करता है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next