माधवन का कहना है कि 31 मार्च तक यह राशि 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने साल 2017-18 के बजट में 13,700 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। वहीं 2018-19 के दौरान ही 33,715 करोड़ रुपये के संशोधित बजट को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा, 'इसमें से 20,287 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जा चुकी है जबकि 16,420 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। आज तक बकाया राशि 15,700 करोड़ रुपये हो चुकी है। इनमें से कोई भी राशि हमें एडवांस में नहीं चाहिए। यह उन उत्पादों और सेवा का बकाया है जिनकी हम पहले ही डिलीवरी कर चुके हैं।'
15,700 करोड़ रुपये में से 14,500 करोड़ रुपये भारतीय वायुसेना पर बकाया हैं। बाकी की बकाया राशि का भुगतान भारतीय सेना, नौसेना और तटरक्षक बल को करना है। सितंबर 2017 से भारतीय वायुसेना ने केवल 2,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वर्तमान में यह बकाया राशि 14.500 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। एचएएल का व्यापार पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय पर निर्भर करता है जो सशस्त्र बलों को बजट आवंटित करती है और वह बदले में एचएएल को पैसा देते हैं।