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एक ऐसा गांव, जहां हिंदू-मुस्लिम का फैसला, मंदिर-मस्जिद से हटेंगे लाउडस्पीकर

Sun, 04 Jun 2017 03:39 PM IST
amarujala.com- presented by : मुकेश झा
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लाउडस्पीकर - फोटो : ie
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सांप्रदायिक सौहार्द के मामले में अक्सर ऐसा देखने को नहीं मिलता जैसा कि मुरादाबाद के एक गांव त्रीयादन में देखने को मिला। त्रीयादन गांव भगतपुर पुलिस स्टेशन के अंर्तगत आता है। दरअसल, गांव में मंदिर और मस्जिद दोनें से लाउडस्पीकर को हटाने का मामला पिछले 3 सालों से चल रहा था लेकिन आज दोनों ने लाउडस्पीकर को हटाने के लिए राजी हो गए। 
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मामले में गांव के सर्किल ऑफिसर चक्रमणी त्रिपाठी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि "मोरादाबाद के पुलिस और जिला प्रशासन दोनों मिलकर इस समस्या का समाधान किए हैं। उन्होंने कहा कि  रमजान के पवित्र महीने में इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण रूप से समाधान किया गया है।"

हालांकि इस मामले में 40 वर्षीय गांव के निवासी दिनेश सिंह ने कहा, "जिन गांवों के साथ कोई लेना-देना नहीं था, वे सांप्रदायिक तनाव पैदा करते थे, जो अक्सर हिंसा में बदल जाता था। बाद में पुलिस ने दोनों समुदायों के खिलाफ मामला दायर की गई।
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उन्होंने कहा कि एक बार जब चीजें हमारे लिए स्पष्ट हो गईं तो हमने एक-दूसरे से बात करने का फैसला किया जो हर किसी के पक्ष में था।"  वहीं, 55 वर्षीय जीकिर हुसैन ने कहा कि "हिंसा करना एक शैतान का काम है। रमजान के पवित्र महीने में हमन लोगों ने मस्जिदों के मीनारों से लाउडस्पीकरों को हटाने का फैसला किया। हमारे हिंदू भाइयों ने भी मंदिरों से लाउडस्पीकर लेने का फैसला किया। अब हम सब सभी यहां शांति से रहेंगे।"

बहरहाल, इस मामले में एसपी उदय शंकर ने टाउम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि लाउडस्पीकर को लेकर मामला गंभीर था जिसके बाद दोनों समुदाय ने आपसी समझौता कर इसे हटाने का फैसला किया।
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