कैराना पलायन मामले पर आक्रामक रुख अख्तियार कर चुकी भारतीय जनता पार्टी कैराना में प्रॉपर्टी की खरीद बेच को आधार मानकर जांच रिपोर्ट रखेगी। भाजपा विधानमंडल दल के नेता की अगुवाई में तैयार हुई जांच रिपोर्ट में कैराना और कांधला से पलायन को सच माना गया है। इसके पीछे बड़ा तर्क यह दिया गया है कि उस जगह पर अब हिंदू रहने तक को तैयार नहीं है। यही कारण है कि बिकने की बांट जोह रही संपत्तियां औने-पौने दाम पर होने के बाद भी हिंदू खरीदार नहीं है।
इस रिपोर्ट में कानून व्यवस्था को कारण बताया गया है। मगर, कानून व्यवस्था के बिगड़ने का बड़ा कारण अपराधियों का एक वर्ग से होना ही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो देश की सियासत में उथल-पुथल मचा रहे कैराना पलायन प्रकरण पर भाजपा की जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर तो सांप्रदायिकता की बात तो नहीं है। मगर, सस्ती संपत्तियों के भी हिंदू खरीदार नहीं होने का तर्क देकर इशारा उसी ओर किया गया है।
रिपोर्ट में वहां के हालात खराब बताए गए हैं और ऐसे माहौल में पलायन बढ़ने की आशंका भी जाहिर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासनिक मशीनरी सत्ता के दबाव में है और यहीं कारण है कि हालात को सियासी रंग देने की कोशिश हो रही है।
सांप्रदायिकता से मुस्लिम ध्रुवीकरण की आशंका
दो अलग-अलग समुदायों में विवाद होने पर एक समुदाय को मिल रही पुलिस की शह के चलते हालात बदतर हुए। रिपोर्ट में बंद कमरे में व्यापारियों के साथ मीटिंग का हवाला दिया गया है। बताया गया है कि यहां व्यापारियों के साथ अत्याचार किया जा रहा है। यही कारण है कि दूसरे व्यापारी भी यहां से पलायन के लिए तैयार बैठे हैं। मगर, उन्हें उनकी संपत्तियों की सही कीमत नहीं मिलने से वे यहां रहने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि अगर कानून व्यवस्था की हालत सुधर जाए तो पलायन भी रुक सकता है। इस रिपोर्ट में महिलाओं के साथ छेड़खानी, व्यापारियों से बदसलूकी का जिक्र कर गुंडा तत्वों को जिम्मेदार ठहराया गया है। गुंडा तत्वों को राजनीतिक संरक्षण का तर्क दिया गया है। आपको बता दें कि कैराना पलायन प्रकरण की जांच को भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में सचेतक राधामोहन अग्रवाल, सांसद सत्यपाल सिंह, राघवलखन पाल शर्मा, सतीश गौतम, धर्मेंद्र कश्यप, भोला सिंह और र्पू्व डीजीपी ब्रजलाल कैराना पहुंचे थे। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है।
भाजपा जांच दल को आशंका है कि अगर पलायन के कारण को सीधे तौर पर सांप्रदायिकता से जोड़ा गया तो आगामी चुनाव में मुस्लिम एक पार्टी या प्रत्याशी के लिए एकजुट हो सकता है। यही कारण है कि कानून व्यवस्था को कारण बताते हुए सांप्रदायिकता को तर्कों से समझाने की कोशिश की गई है।