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भारत सबसे पहले हिंदुओं का देश, बाकियों का हक बाद में: शिवसेना

Mon, 30 Oct 2017 05:49 PM IST
एजेंसी/ मुंबई
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- फोटो : PTI
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भारत को पहले हिंदुओं और बाद में अन्य का देश बताते हुए शिवसेना ने सोमवार को कहा कि केन्द्र में ‘हिंदुत्व समर्थक’ सरकार होने के बावजूद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण व कश्मीरी पंडितों की घर वापसी जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर में शुक्रवार को कहा था कि हिंदुस्तान हिंदुओं का देश है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यह दूसरों का नहीं है। शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने कहा, ‘आरएसएस प्रमुख का कहना है कि हिंदुओं की भांति भारत दूसरों का भी है। जबकि शिवसेना प्रमुख का कहना है कि भारत पहले हिंदुओं का है, बाद में अन्य किसी का क्योंकि मुसलमानों के 50 से ज्यादा देश मौजूद हैं।’

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संपादकीय के मुताबिक, ईसाईयों के पास अमेरिका और यूरोप (वहां के देश) जैसे देश हैं। बौद्धों के लिए चीन, जापान, श्रीलंका और म्यांमार हैं। हिंदुओं के पास इसके अलावा कोई देश नहीं है। वर्तमान में हिंदुत्व समर्थक, बहुमत वाली सरकार है। फिर भी वह अयोध्या में राम मंदिर बनाने की इच्छुक नहीं है और उसने इसके भविष्य को अदालत के हाथों में छोड़ दिया है।
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केन्द्र में एनडीए सरकार की एक घटक और महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने कहा है कि हिंदुत्व समर्थक सरकार होने के बावजूद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हुई है।

वंदे मातरम् को लेकर अड़ियल रवैया
शिवसेना ने सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रगीत गाए जाने को लेकर जारी बहस पर भी अपना विचार दिया। पार्टी ने कहा है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों पूर्णतया आरएसएस की विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं, इसके बावजूद ‘वंदे मातरम्’ गाने को लेकर अड़ियल रवैया है। 

संपादकीय में लिखा है, ‘अगर ‘अन्य’ खड़े ना होकर राष्ट्रगीत का अपमान कर रहे हैं, तो आरएसएस प्रमुख को हिंदुत्व समर्थक सरकार को निर्देश देना चाहिए कि ऐसे लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाया जाए।’
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