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क्या हिंदू, क्या मुसलमान, यहां सब खाते हैं बीफ

Tue, 17 May 2016 02:32 PM IST
नितिन श्रीवास्तव/बीबीसी संवाददाता
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यहां सब खाते हैं बीफ - फोटो : BBC
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दोपहर के ढाई बजे हैं और सुबह नाश्ते में सिर्फ एक सेब खाने से मेरी भूख ने अब सुनना-समझना बंद कर दिया है। तमिलनाडु चुनाव कवर करने के चक्कर में पिछले कई दिनों से इडली-डोसा और उत्थप्पम खाने के बाद अब मुझे ज़ायका भी बदलना है। टैक्सी ऐसे इलाके से गुज़रती है, जिसकी हवा में सिर्फ़ खड़े मसालों और शोरबेदार खानों की ख़ुशबू है। अब भूख हिंसक भी हो सकती है, इसलिए मैं गाड़ी रुकवा कर सबसे पहली दुकान पर ही ऑर्डर दे बैठता हूँ। बड़ी से डेग में बिरयानी बिक रही है और नीचे बैनर पर 40 रुपए प्लेट लिखा है।
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मुझे पता है कि ये बीफ़ बिरयानी ही हो सकती है, क्योंकि इतने में अगर दुकानदार मटन बिरयानी बेचेगा तो जल्दी दिवालिया हो सकता है। वैसे भी, लखनऊ शहर में हुई परवरिश के चलते आप 'बड़े की बिरयानी और बड़े का कबाब' से दर्जनों बार, दो चार होते रहते हैं। स्कूल के दिनों में सहारा 'बड़े' का ही था, क्योंकि पॉकेट मनी में दस्तरख़्वान तो सजा नहीं सकते। लौटिए चेन्नई में जहाँ बीफ़ बिरयानी परोसने पर, मैं उस पर टूट तो पड़ा हूँ, लेकिन ध्यान मेरा कहीं और है। अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि यहाँ पर बीफ़ बिरयानी खाने या पैक कराने वालों में हिंदू-मुसलमान दोनों हैं।


अभी तो भूख मिटानी थी, इसलिए छोड़ दिया। लेकिन दो किलोमीटर बाद फिर से बीफ़ बिरयानी के बोर्ड दिखने लगे, तो ट्रिप्लीकेन मोहल्ले की एक दुकान पर रुक ही गए। रहमत बीफ़ बिरयानी के मालिक एेहतशाम ने कहा, "50 रुपए प्लेट है और चावल की क्वालिटी भी अच्छी है। दिन में 80-100 किलो बिकती है और इलाके के हिंदू-मुसलमान और ईसाई हमारे यहाँ बीफ़ खाने आते हैं। मेरे तमाम हिंदू दोस्त हैं, जिनके घर रोज़ के एक-डेढ़ किलो पैक हो कर भी जाती है।" तामिलनाडु राज्य के लगभग हर शहर में ऐसे इलाके हैं, जहाँ बीफ़ और उसके पकवान बिकते हैं और राज्य में अगर मटन 500 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, तो बीफ़ का दाम 240 रुपए है।
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एक दूसरे इलाके परियमएट में तीन दोस्तों, सुशील, रामकुमार और किशोर से मुलाक़ात हुई, जो असम और पश्चिम बंगाल से चार साल पहले चेन्नई आए थे। बीफ़ बिरयानी के मज़े लेकर काम पर जा रहे सुशील ने बताया, "40-50 रुपए में नॉन-वेज खाने को मिलता है और साफ-सुथरा। अच्छी बात यही है कि यहाँ बीफ़ के नाम पर कोई आपको घूर कर नहीं देखता"। चेन्नई के ज़ाम बाज़ार इलाके में भी बीफ़ बिरयानी की लगभग सभी दुकानें खचाखच भरी दिखीं और कुछ में बीफ़ के बोटी कबाब भी मिल रहे थे।



चेन्नई बीफ़ बिरयानी के मालिक अमीर ने बताया कि तमिलनाडु में बीफ़ मतलब बीफ़ है, गोमांस नहीं। उन्होंने कहा, "देखिए बीफ़ में प्रोटीन होता है और ये सस्ता भी है। साधारण लोग चाहे वो हिंदू, मुसलमान कोई हो, सभी का पेट भी भरता है और पौष्टिकता भी मिलती है। यही इसके हिट होने का राज़ है"। स्थानीय लोगों को भी लगता है कि उत्तर प्रदेश के दादरी में 2015 में कथित रूप से बीफ़ रखने पर हुई हत्या और उसके बाद की राजनीति का चेन्नई पर शायद ही कोई असर पड़ा हो।



वरिष्ठ पत्रकार वलियप्पन बताते हैं, "दादरी की घटना और दूसरे राज्यों में हो रही राजनीति के चलते चेन्नई में कई संगठनों ने एक दिन का बीफ़ फेस्टिवल आयोजित किया और मद्रास हाई कोर्ट में वकीलों ने उस हत्या के विरोध में बीफ़ खाया और बांटा। तमिलनाडु में इस तरह एक मुद्दे से किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता"। मैं भी सोचने पर मजबूर हो गया हूँ कि स्कूल के दिनों में हफ़्ते में कम से कम एक बार, बड़े का कबाब खाने के बाद भी कभी पीछे पलट कर नहीं सोचा कि कोई क्या कहेगा।
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