आगरा को सुलहकुल की नगरी यूं ही नहीं कहा जाता। मिसाल देखनी हो तो रमजान के महीने में गुड़ की मंडी में कदम रखिए। यहां आपको सर्वधर्म समभाव का मेला लगा नजर आएगा। यहां पर 200 साल पुरानी इमली वाली मस्जिद में पांच दिन चलने वाले शबीना यानी कुरान का पाठ खत्म होने वाले प्रोग्राम के लिए व्यवस्थाएं हिंदू और ईसाई समाज के लोग करते हैं।
पुरुषार्थी संघ मार्केट के दुकानदार सड़क और छतों पर होने वाली नमाज के लिए दुकानें बंद कर देते हैं। साफ सफाई कराते हैं। सेंट जोंस चर्च परिसर में नमाजियों के लिए वुजू का इंतजाम किया जाता है। एसएन मेडिकल कालेज परिसर में नमाजियों की गाड़ियों की पार्किंग बनाई जाती है।
यूं तो रमजान में शहर की लगभग सभी मस्जिदों में शबीना यानी कुरान ए पाक का पाठ और तरावीह का दौर चल रहा है, लेकिन गुड़ की मंडी स्थित इमली वाली मस्जिद में चलने वाले पांच रोजा शबीना की खासियत अलग है। मस्जिद के मुतवल्ली सैयद इरफान सलीम बताते हैं कि मस्जिद परिसर में ही शहीद अब्दुल्ला बाबा की दरगाह भी है।
बाजार में ज्यादातर दुकानें हैं हिंदुओं की
गुड़ की मंडी के बाजार में ज्यादातर दुकानें हिंदुओं की हैं।
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
गुड़ की मंडी के बाजार में ज्यादातर दुकानें हिंदुओं की हैं, लेकिन बरसों से मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सहगल कुरान ए पाक के खत्म होने पर होने वाली नमाज की व्यवस्था संभालते हैं। इसके लिए मार्केट की छतों पर सफाई कराई जाती है। सड़क पर भी साफ सफाई और फर्श बिछाने का काम किया जाता है ताकि बाहर से शबीना में आने वाले नमाजियों को दिक्कत नहीं हो।
इस खास आयोजन के लिए मार्केट को शाम सात बजे ही बंद कर दिया जाता है। इसके बाद दुकानदार सड़क पर होने वाली नमाज के लिए चारों ओर खड़े होते हैं ताकि कोई जानवर आदि नहीं घुस सके। उधर, सेंट जोंस चर्च के रॉनी रैन्सन, राजू नेल्सन समेत अन्य लोग परिसर में नमाजियों के लिए वुजू की व्यवस्था करते हैं। इस मौके पर मस्जिद की ओर से शमीम अहमद शाह, समी आगाई, सैयद मेहराज, सैयद अशफाक अहमद, सैयद नईम अहमद का सहयोग रहता है।