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Himalayan Glacier: पिघलते ग्लेशियर बन रहे मौत का खतरा: झील फटने से 609 तबाहियां, 13 हजार से ज्यादा जानें गईं

Sun, 28 Dec 2025 05:28 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जलवायु परिवर्तन से हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। बीते 120 वर्षों में ग्लेशियर झीलों के टूटने से 609 विनाशकारी घटनाएं हुईं, जिनमें 13,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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हिमालय की ऊंची चोटियों पर जमी बर्फ अब सिर्फ जलवायु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ जानलेवा खतरा बनती जा रही है। बीते 120 वर्षों के वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि ग्लेशियर झीलों के टूटने से आई बाढ़ की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं और अब तक दुनिया भर में 13,000 से अधिक जिंदगियां निगल चुकी हैं।

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सिक्किम की तीस्ता घाटी में आई तबाही इसी खतरे की ताजा और भयावह मिसाल है, जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में ऐसी त्रासदियां अपवाद नहीं, बल्कि सामान्य हो जाएंगी। अक्टूबर 2023 में सिक्किम की तीस्ता घाटी में आई विनाशकारी बाढ़ ने 55 लोगों की जान ले ली और 1,200 मेगावाट क्षमता का हाइड्रोपावर डैम पूरी तरह बह गया। यह बाढ़ दक्षिण ल्होनक झील के टूटने से आई थी, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) कहा जाता है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हिमालय की शांत दिखने वाली बर्फ के नीचे एक गहरा और खामोश खतरा लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम (जिसमें ब्रिटेन की डंडी यूनिवर्सिटी के ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉक्टर साइमन कुक शामिल हैं) ने 120 वर्षों के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया।

हर साल जीएलओएफ की 15 घटनाएं
सैटेलाइट चित्रों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में जीएलओएफ की 609 घटनाओं की पहचान की है। यह संख्या पहले के वैश्विक रिकॉर्ड से कहीं अधिक है, जहां 1900 से 2020 के बीच सिर्फ 400 घटनाएं दर्ज थीं। शोध के मुताबिक इनमें सबसे ज्यादा घटनाएं हिमालय और ट्रॉपिकल एंडीज क्षेत्रों में हुई हैं, जहां मानव आबादी और बुनियादी ढांचे पर असर सबसे गंभीर रहा है।
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अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बढ़ते वैश्विक तापमान और ग्लेशियर झीलों के टूटने के बीच सीधा संबंध है। 1981 से 1990 के बीच दुनिया भर में हर साल औसतन पांच ऐसी बाढ़ की घटनाएं होती थीं, जबकि 2011 से 2020 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 15 प्रति वर्ष हो गया।

मौतों का वैश्विक आंकड़ा
ग्लेशियर झीलों के टूटने से आई बाढ़ अब तक दुनिया भर में 13,000 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है। सबसे ज्यादा नुकसान हिमालयी क्षेत्र और दक्षिण अमेरिका के ट्रॉपिकल एंडीज में हुआ है, जहां पहाड़ी ढलानें, नदियां और मानव बस्तियां सीधे इस खतरे की जद में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है, क्योंकि कई दूरदराज़ इलाकों में सभी घटनाओं की पूरी रिपोर्टिंग नहीं हो पाती।
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